NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा के मामले पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है. कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया है. इसका लाभ उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिनका कोई पिछला अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. वहीं, पुलिस को फिलहाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने को कहा गया है. हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस अंतरिम राहत से बाहर रखा गया है.
पुलिस कार्रवाई की जांच के साथ नाबालिग छात्रों को राहत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों को गंभीर माना है. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया सामने आए आरोप निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत दिखाते हैं. याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किया गया. वहीं, पुलिस की ओर से प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावे भी सामने आए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर नाबालिग प्रदर्शनकारियों को राहत दी है. कहा कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे छात्रों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया गया है.
कोर्ट के निर्देश का मतलब यह भी है कि केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर छात्रों के खिलाफ फिलहाल कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, जिन लोगों का आपराधिक इतिहास है, उन्हें इस संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.
CCTV और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का आदेश, 3 अगस्त को अगली सुनवाई
कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है. इसमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, पुलिस बॉडी कैमरा वीडियो, वायरलेस कम्युनिकेशन और पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी या व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए.
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई में संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की मौजूदगी भी मांगी है. कोर्ट के निर्देश के बाद अब अलग-अलग राज्यों में हिरासत में लिए गए छात्रों और प्रदर्शनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
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