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    Home»क्राइम»ऑपरेशन नवजीवन-II का असर: झारखंड में 16 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा, हथियार डालकर चुना मुख्यधारा का रास्ता
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    ऑपरेशन नवजीवन-II का असर: झारखंड में 16 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा, हथियार डालकर चुना मुख्यधारा का रास्ता

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 28, 2026No Comments5 Mins Read2
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    रांची: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत 16 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आज यानि की 28 जुलाई को इन सभी ने झारखंड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वालों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं.
    इनमें संगठन के अलग-अलग स्तर पर काम कर चुके कमांडर और सदस्य भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, इनमें 1 RCM, 3 ZCM, 3 SZCM, 6 ACM और 3 दस्ता सदस्य हैं.

    11 हथियार और 1562 गोलियां सौंपकर हिंसा को कहा अलविदा

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने सिर्फ हथियार ही नहीं छोड़े, बल्कि अपने पास मौजूद 11 हथियार और 1562 राउंड गोलियां भी पुलिस को सौंप दीं. इनमें 6 इंसास राइफल, 2 AK-47, एक HK-33, एक US कार्बाइन और एक M-16 राइफल शामिल है.
    आत्मसमर्पण करने वालों में से 14 माओवादी कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में, जबकि 2 लातेहार जिले में सक्रिय थे. पुलिस के मुताबिक, इनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्हें इन इलाकों के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों की अच्छी जानकारी थी.
    अब इन लोगों ने हिंसा से दूरी बनाकर सामान्य जिंदगी की ओर लौटने का फैसला किया है. सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत इन्हें नई जिंदगी शुरू करने का अवसर मिलेगा.

    इसी दस्ते के 8 और माओवादी भी छोड़ रहे हिंसा का रास्ता

    झारखंड पुलिस के मुताबिक, इसी दस्ते से जुड़े 8 और माओवादी छत्तीसगढ़ में भी आत्मसमर्पण कर रहे हैं. इनमें 3 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं.
    पुलिस का मानना है कि एक साथ इतने माओवादियों का हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना संगठन के लिए बड़ा झटका है. वहीं, इससे कोल्हान, सारंडा और आसपास के इलाकों में शांति और सुरक्षा का माहौल मजबूत होने की उम्मीद है.

    पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले 16 लोगों में से 15 झारखंड के अलग-अलग जिलों के स्थानीय निवासी हैं. इनमें पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो, रांची, सरायकेला-खरसावां और गिरिडीह के लोग शामिल हैं. एक सदस्य ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले का रहने वाला है.

    2026 में अब तक 45 नक्सली लौटे मुख्यधारा में

    झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. इसके अलावा 93 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है.
    इस साल अब तक 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं. पुलिस के मुताबिक, लगातार चल रहे अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के कारण कई नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौट रहे हैं.

    इससे पहले 21 मई 2026 को 27 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था. वहीं, जुलाई में 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी और 25 लाख रुपये के इनामी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी भी हुई.

    चाईबासा और लातेहार में कई बड़े हमलों में इनका नाम

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के बारे में पुलिस ने दावा किया है कि इनमें से कई का नाम पश्चिमी सिंहभूम जिले में हुए गंभीर नक्सली मामलों में सामने आया था. इन मामलों में 2021 में टोकलो के लांजी जंगल में IED विस्फोट भी शामिल है, जिसमें झारखंड जगुआर के 3 जवान शहीद और 3 घायल हुए थे.

    इसके अलावा 2020 में कराईकेला इलाके में ग्रामीण कृष्णा सवैया की हत्या, 2022 में गोईलकेरा इलाके में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के दो अंगरक्षकों की हत्या और सुरक्षाबलों के हथियार लूटने जैसी घटनाओं का भी पुलिस ने जिक्र किया है. वहीं 2021 में गोईलकेरा के केतापी इलाके में वन विभाग की JCB मशीन जलाने और एक मुंशी की हत्या का मामला भी पुलिस की सूची में है.

    इसके अलावा 2023 में तुम्बाहाका और हुसीपी के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़, 2024 में ग्रामीण की हत्या और 2025 में कई IED ब्लास्ट की घटनाओं में भी इन आत्मसमर्पित माओवादियों के नाम पुलिस ने जोड़े हैं.

    लातेहार से जुड़े दो माओवादियों के बारे में पुलिस ने पुराने मामलों का हवाला दिया है. 2018 में मण्डरिया इलाके में लैंडमाइन ब्लास्ट में झारखंड जगुआर के 6 जवान शहीद और 4 घायल हुए थे. इसके अलावा 2020 में ग्रामीण जागीर उरांव की हत्या और 2021 में IED विस्फोट की घटना का भी पुलिस ने जिक्र किया है. पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की कथित भूमिका रही है.

    कोल्हान-सारंडा में शांति की उम्मीद, पुलिस ने कहा-हथियार छोड़िए और लौट आइए

    कोल्हान और सारंडा का इलाका लंबे समय से नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा है. लेकिन अब यहां हालात बदलने की उम्मीद मजबूत हो रही है.
    सुरक्षाबलों के लगातार अभियान के साथ-साथ सरकार की पुनर्वास नीति का असर भी दिखाई दे रहा है. जो लोग कभी हथियार लेकर जंगलों में चले गए थे, उनमें से कई अब वापस समाज का हिस्सा बनने का रास्ता चुन रहे हैं.

    झारखंड पुलिस ने बचे हुए माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं.

    ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत 16 माओवादियों का यह आत्मसमर्पण झारखंड में बदलती तस्वीर की एक बड़ी मिसाल है. उम्मीद है कि कोल्हान, सारंडा और झारखंड के दूसरे इलाकों में बंदूकों की जगह विकास, शिक्षा, रोजगार और शांति की आवाज और मजबूत होगी.

    Also Read : झारखंडः पांच महिलाओं सहित, 16 माओवादियों ने किया सरेंडर, देखें पूरी लिस्ट

    ऑपरेशन नवजीवन-II झारखंड में नक्सलवाद माओवादी छत्तीसगढ़
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