राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े आतंकी साजिश मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई है. अदालत ने यह फैसला एनआईए द्वारा दर्ज आरसी-02/2022/एनआईए/एचवाईडी मामले में सुनाया.
दोषी ठहराए गए आरोपियों में डोंगरी देवेंद्र, दुबाशी स्वप्ना और चुक्का शिल्पा शामिल हैं. जांच में सामने आया कि तीनों चैतन्य महिला संगम (सीएमएस) के सदस्य थे, जो प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के लिए कार्य करने वाला संगठन है. इन पर संगठन के लिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने, नए सदस्यों की भर्ती करने, समर्थन जुटाने और साजिश रचने के आरोप सिद्ध हुए.
यूएपीए की कई धाराओं में सजा, जुर्माना भी लगाया
विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18, 18बी, 20, 38 और 39 के तहत पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ (समवर्ती) चलेंगी.
इसके अलावा प्रत्येक धारा के तहत प्रत्येक आरोपी पर 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह के साधारण कारावास (एसआई) की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.
एनआईए ने जून 2022 में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था और दिसंबर 2022 में इनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. आरोपपत्र में दो फरार वरिष्ठ भूमिगत माओवादी कैडर गजरला रवि उर्फ उदय तथा वेंकट रवि चैतन्य उर्फ अरुणा को भी आरोपी बनाया गया था.
यह मामला मूल रूप से आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जिसे जून 2022 में एनआईए ने अपने हाथ में लिया. जांच एजेंसी के अनुसार मामला प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के लिए साजिश रचने, भर्ती अभियान चलाने, संगठन को समर्थन देने, उससे जुड़े रहने तथा लोगों को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने से संबंधित था. अदालत के इस फैसले को माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एनआईए की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है.
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