झारखंड पुलिस ने अपने दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को बड़ा सहारा दिया है. DGP तदाशा मिश्रा के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय में अनुकंपा समिति की एक हाईलेवल बैठक हुई. इसमें कुल 153 आश्रितों को पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर सरकारी नौकरी देने का फैसला किया गया. इसका मकसद सर्विस के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों को एक सम्मानजनक आजीविका और सहारा देना है.
मुख्यालय में यह अहम बैठक ADG (मुख्यालय, अतिरिक्त प्रभार) मनोज कौशिक की अध्यक्षता में की गई थी. इस कमेटी में जैप डीआईजी कार्तिक एस, स्पेशल ब्रांच के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, सीआईडी डीआईजी चंदन कुमार झा और एसपी (गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा) बतौर सदस्य शामिल हुए.
कमेटी के सामने अनुकंपा पर नियुक्ति से जुड़े कुल 160 पेंडिंग मामले आए थे. अधिकारियों ने एक-एक फाइल को खंगाला. इसके बाद 153 मामलों को तुरंत मंजूरी दे दी गई, जबकि 4 मामलों को जरूरी दस्तावेज न होने के कारण होल्ड पर रखा गया है. वहीं, नियमों के दायरे में न आने वाले 3 मामलों को रिजेक्ट कर दिया गया. कमेटी के फैसले के बाद कुल 153 युवाओं को उनकी योग्यता के हिसाब से पदों पर नियुक्त किया गया है. इनमें 66 कॉन्स्टेबल, 62 बाल आरक्षी, 24 महिला आरक्षी और एक फायरमैन ड्राइवर शामिल है.
झारखंड पुलिस अपने जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हमेशा संवेदनशील रही है. इससे पहले पिछले साल 9 अक्टूबर को हुई अनुकंपा समिति की बैठक में 85 मामलों पर विचार किया गया था, जिसमें से 84 आश्रितों को नौकरी दी गई थी. डीजीपी तादाशा मिश्रा का कहना है कि ऐसी संवेदनशील प्रक्रियाओं को बिना किसी देरी के समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
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