राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज़ सईद को सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया है. एजेंसी ने जम्मू की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में हाफिज़ सईद पर हमले की साजिश रचने, सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं. NIA का दावा है कि जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक और तकनीकी सबूतों से पाकिस्तान की भूमिका और हाफिज़ सईद की कथित संलिप्तता के अहम तथ्य सामने आए हैं.
एनआईए ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद पर व्यक्तिगत तौर पर और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रमुख के रूप में आरोप लगाए हैं. एजेंसी का कहना है कि जांच में मिले सबूतों के आधार पर उसकी भूमिका को चार्जशीट में शामिल किया गया है.
भारत के खिलाफ साजिश और युद्ध छेड़ने के आरोप
चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने से जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं.
एनआईए के अनुसार, सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पाकिस्तान से रची गई साजिश, हाफिज़ सईद की कथित भूमिका और वैज्ञानिक जांच, तकनीकी विश्लेषण तथा जमीनी पड़ताल के दौरान जुटाए गए सबूतों का विस्तृत उल्लेख किया गया है. यह चार्जशीट पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट के बाद पेश की गई है.
इससे पहले 15 दिसंबर 2025 को दाखिल चार्जशीट में एनआईए ने पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट को आरोपी बनाया था. इसके अलावा जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीन आतंकियों और दो गिरफ्तार आरोपियों को भी चार्जशीट में शामिल किया गया था. जांच एजेंसी ने लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ को भी इस साजिश में कानूनी इकाई के रूप में आरोपी बनाया है.
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया था. इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हो गई थी. घटना के बाद पहलगाम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. शुरुआती जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामला एनआईए को सौंप दिया.
एनआईए का कहना है कि वह इस मामले में पाकिस्तान से संचालित पूरे आतंकी नेटवर्क और सीमा पार से रची गई साजिश की जांच कर रही है. एजेंसी का उद्देश्य हमले की योजना बनाने, उसे अंजाम देने और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाकर उन्हें कानून के दायरे में लाना है.

