17 अप्रैल 2027, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो पाया। सदन में विधेयक के गिरने पर भाजपा ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके को नारी विरोधी बताया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए भाजपा लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है। लेकिन भाजपा के अंदरखाने संगठन में भी जब महिलाओं को राज्य की प्रदेश कार्यसमितियों में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया तो इसे लेकर पार्टी में बेचैनी है। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा अपनी टीम का गठन किए जाने की उम्मीद है, जिससे भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
बीते दिनों भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने कहा था कि महिला मोर्चा के अलावा, जिसकी राष्ट्रीय स्तर और प्रत्येक राज्य स्तर पर इकाइयां हैं, केंद्र और प्रत्येक राज्य में एक-तिहाई पदाधिकारी महिलाएं हैं। भले ही कुछ जगहों पर रिक्तियाँ हों, उन्हें महिलाओं द्वारा ही भरा जाएगा। हालांकि झारखंड जैसे राज्य में जहां कुछ माह पहले ही नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर आदित्य साहू की ताजपोशी हुई है, वहां प्रदेश पदाधिकारियों का ऐलान किया जा चुका है, लेकिन 33 प्रतिशत महिला कोटा के कारण प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा नहीं हो पायी है। झारखंड में भाजपा नेताओं के सामने परेशानी इस बात को लेकर भी है कि अब प्रदेश कार्यसमिति में कुल सदस्यों की संख्या 90 तक सिमित कर दी गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी कमेटी के 24 पदाधिकारियों का ऐलान कर दिया है। ऐसे में अब 66 नेताओं व कार्यकर्ताओं को ही प्रदेश कार्यसमिति में शामिल किया जाएगा। झारखंड भाजपा में अबतक 150 से अधिक नेताओं को कार्यसमिति में शामिल किया जाता रहा है, बैकडोर से भी प्रदेश कार्यसमिति में नेताओं की इंट्री होती रही है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के पास अब समिति अधिकार हैं। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति में कम से कम 22 महिलाओं को जगह देनी होगी।
भाजपा में कितना रहा है महिलाओं का प्रतिनिधित्व
भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपने पहले कार्यकाल में राजनाथ सिंह जून 2007 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने अध्यक्षीय भाषण में पार्टी संगठन में 33% आरक्षण की वकालत की थी। इसके बाद सात सदस्यीय कमेटी बनायी गई थी, जिसमें सुषमा स्वराज के अलावा सुमित्रा महाजन, नजमा हेपतुल्ला, किरण माहेश्वरी,बाल आप्टे,किरेन रिजिजू और किशन रेड्डी सदस्य के तौर पर शामिल थे। इस समिति की अनुशंसा के बाद भाजपा के संविधान में एक तिहाई आरक्षण को अनिवार्य बनाया गया। हालांकि वर्तमान में 396 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों में से केवल 37 (यानी 9%) महिलाएं हैं। शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था, 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में भी भागीदारी नगण्य है।
सदन में क्या है स्थिति
वर्तमान लोकसभा में, सदन में अपनी कुल संख्या के 39% के साथ टीएमसी महिला सांसदों की सूची(विलय पूर्व स्थिति) में शीर्ष पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों में महिला सांसदों की हिस्सेदारी क्रमशः 13% और 13.4% के साथ लगभग समान है। हालांकि, भाजपा में कांग्रेस (13%) की तुलना में महिला उम्मीदवारों का अनुपात (16%) अधिक था। एक अन्य बड़ी क्षेत्रीय पार्टी, द्रमुक का लोकसभा में नेतृत्व एक महिला,कनिमोझी कर रही हैं, लेकिन उसके 22 सांसदों में से केवल तीन महिलाएँ (13.6%) हैं।
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