मुस्कान चौधरी
जमशेदपुर के पोटका प्रखंड में फैले ब्रेन मलेरिया ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. महज 72 घंटे के भीतर चार बच्चों की मौत और दो दर्जन के करीब लोगों के बीमार होने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. लगातार सामने आ रहे नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, जबकि अस्पतालों में भर्ती कई बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है.
मृतकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, आठ वर्षीय राहुल सरदार, आठ वर्षीय सुबोला सरदार और एक वर्षीय खुशबू सरदार शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग की जांच में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की तीन छात्राओं समेत नौ नए मरीजों की पहचान की गई है. विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है तथा छात्राओं की लगातार निगरानी की जा रही है.
गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल भेजा गया है. कई मरीजों को तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी और दौरे जैसी शिकायतों के साथ भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों के इलाज में जुटी हुई है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है. अब तक 600 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है. स्वास्थ्यकर्मी लोगों को मलेरिया से बचाव के प्रति भी जागरूक कर रहे हैं.
जिला प्रशासन ने एक छात्रा के इलाज में कथित लापरवाही के आरोप में एक निजी क्लिनिक को सील कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी. रविवार को DC ने एमजीएम अस्पताल का निरीक्षण कर भर्ती मरीजों का हाल जाना. DC ने बताया कि दो बच्चों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य मरीजों की स्थिति में सुधार हो रहा है. इस बीच हरिणा पंचायत के कंदर गांव के महावीर सरदार के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. चार दिनों के भीतर उनकी दो बेटियों, सुबोला और खुशबू, की मौत हो गई. परिवार की तीसरी बेटी भी बुखार से पीड़ित बताई जा रही है.
कैसे फैलता है ब्रेन मलेरिया
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन मलेरिया ‘प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम’ नामक परजीवी के कारण होता है. यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है. शरीर में प्रवेश करने के बाद यह परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है और दिमाग की छोटी रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है. इससे मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है. बारिश के मौसम और जलजमाव के कारण एनोफिलीज मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी, बेहोशी, दौरे पड़ना और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं.
क्या उपाय है?
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को कीटनाशकयुक्त मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने की सलाह दी है. साथ ही शाम और रात के समय पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनने को कहा गया है, ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके. अधिकारियों ने घरों के आसपास, कूलर, गमलों और पुराने टायरों में पानी जमा नहीं होने देने की भी अपील की है, क्योंकि यही स्थान मच्छरों के पनपने के प्रमुख केंद्र बनते हैं. इसके अलावा मच्छर भगाने वाली क्रीम और अन्य बचाव उपायों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके.
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