Ranchi : झारखंड में एक बार फिर शिक्षकों की बहाली और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है. सीएम हेमंत सोरेन द्वारा 1042 सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है. भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने सरकार के इस कदम को महज एक ‘फोटो सेशन’ और ‘प्रचार की राजनीति’ करार दिया है. उनका कहना है कि सरकार असल मुद्दों को छिपाने के लिए छोटे-छोटे आयोजनों को बड़ा उत्सव बनाकर पेश कर रही है.
सिर्फ 2 फीसदी भर्ती पर जश्न क्यों?
प्रतुल शाह देव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की इस कामयाबी पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षकों के लगभग 50 हजार पद खाली पड़े हैं. ऐसे में सिर्फ 1000 पदों पर नियुक्ति करना ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है. यह कुल रिक्तियों का केवल 2 प्रतिशत है, जबकि 98 प्रतिशत पद आज भी खाली हैं. प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई जश्न मनाने की बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकार पूरी तरह विफल रही है. सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर कब तक लाखों बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ होता रहेगा.
प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं हजारों स्कूल
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का जिक्र करते हुए प्रतुल शाह देव ने कहा कि राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में स्थायी हेडमास्टर ही नहीं हैं. ये स्कूल सालों से प्रभारी प्रधानाचार्यों के भरोसे जैसे-तैसे चल रहे हैं. नियमित प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का मामला वर्षों से अटका पड़ा है, जिससे पूरा शिक्षा तंत्र अस्थायी व्यवस्था पर टिक गया है. इसके अलावा, जो शिक्षक मौजूद हैं, उन्हें भी पढ़ाई के बजाय चुनावी और प्रशासनिक जैसे गैर-शैक्षणिक कामों में लगा दिया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर शिक्षक इन कामों में व्यस्त रहेंगे, तो स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएगा कौन?
शिक्षक और छात्र के अनुपात में भारी अंतर
बीजेपी प्रवक्ता ने झारखंड में राष्ट्रीय औसत की तुलना में शिक्षकों की भारी कमी को भी उजागर किया. उन्होंने बताया कि देश के सरकारी स्कूलों में औसतन हर 24 बच्चों पर एक शिक्षक होता है. इसके विपरीत, झारखंड में हालात बेहद चिंताजनक हैं. यहाँ राष्ट्रीय औसत से 34 प्रतिशत की कमी है और 36 छात्रों पर मुश्किल से एक शिक्षक मिल पाता है. उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी राज्य के हर बच्चे को उसका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी. झारखंड के बच्चों को केवल विज्ञापनों और प्रचार की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें स्कूलों में पूरे शिक्षक, परमानेंट हेडमास्टर और एक मजबूत शिक्षा व्यवस्था चाहिए, तभी राज्य का भविष्य सुधर सकता है.
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