Ranchi : झारखंड में 30 जून से शुरू होने वाले SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। शुक्रवार को यूनाइटेड मिली फोरम, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान, एपीसीआर झारखंड, भारत जोड़ो अभियान/साझा कदम और झारखंड जनाधिकार महासभा के प्रतिनिधियों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। उनका कहना था कि ग्रामीण, आदिवासी, मुस्लिम और महिला मतदाताओं के नाम कटने का खतरा ज्यादा है, इसलिए विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
खतियान को मान्यता और सोशल ऑडिट की मांग
संगठनों ने मांग की कि सत्यापन के दौरान खतियान और वंशावली को मान्य दस्तावेज माना जाए। साथ ही ग्राम सभाओं की भूमिका भी तय की जाए। उन्होंने मतदाता सूची का सोशल ऑडिट कराने की मांग करते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम हटाने या छूटने की संभावना हो, उनकी सूची ग्राम सभा और वार्ड स्तर पर सार्वजनिक की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने खेती के मौसम को देखते हुए SIR की समय-सीमा बढ़ाने, ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के नियम को हटाने और किसी भी मतदाता का नाम काटने से पहले कम से कम 30 दिन का लिखित नोटिस देने की भी मांग की। इस दौरान अफजल अनीस, मंथन, मोहम्मद जियाउलह, प्रवीर पीटर, एलिना होरो, प्रियशिला, रिया तुलिका पिंगुआ और टॉम कावला मौजूद रहे।
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