Deoghar : साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही देवघर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। एसपी प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर थाना और सारठ थाना की संयुक्त टीम ने सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में छापेमारी कर चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये लोग जंगल में बैठकर ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क चला रहे थे और देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि डकाय जंगल में कुछ युवक मोबाइल और इंटरनेट की मदद से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। सूचना मिलते ही साइबर थाना और सारठ थाना की टीम सक्रिय हुई और संयुक्त छापेमारी की गई। पुलिस को देखते ही कुछ लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन टीम ने चार आरोपितों को मौके से धर दबोचा। तलाशी के दौरान उनके पास से सात मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान कमरूद्दीन अंसारी, अब्दुल करीम अंसारी और समीर अंसारी के रूप में हुई है। ये तीनों सारठ थाना क्षेत्र के कपसा गांव के निवासी हैं। वहीं चौथा आरोपी वसीम अंसारी पालाजोरी थाना क्षेत्र के असहना गांव का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी देवघर जिले के निवासी हैं और लंबे समय से साइबर ठगी के धंधे में सक्रिय होने की आशंका है।
फ्लिपकार्ट-अमेजन का फर्जी कस्टमर केयर बनकर करते थे ठगी
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपित खुद को फ्लिपकार्ट और अमेजन का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे। इसके अलावा गूगल पे, फोन पे और पेटीएम के अधिकारी बनकर भी लोगों से संपर्क करते थे। वे लोगों को कैशबैक, रिफंड या अकाउंट संबंधी समस्या का झांसा देकर उनसे बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे और फिर उनके खातों से पैसे उड़ा लेते थे। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी पीएम किसान योजना, बिजली बिल भुगतान और आरटीओ चालान के नाम पर लोगों को एपीके फाइल भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड करता था, साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल का एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल लेते थे।
एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर भी लोगों को बनाते थे शिकार
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे। वे एयरटेल थैंक्स ऐप में कार्ड बंद होने या उसे दोबारा चालू कराने का बहाना बनाकर ग्राहकों से गोपनीय जानकारी हासिल करते थे। जानकारी मिलते ही उनके बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल लिए जाते थे। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि गिरफ्तार आरोपी समीर अंसारी पहले भी साइबर अपराध के मामले में जेल जा चुका है। वह साइबर थाना कांड संख्या 76/21 में आरोपी रह चुका है। जेल से बाहर आने के बाद भी उसने साइबर ठगी का रास्ता नहीं छोड़ा और फिर उसी धंधे में जुट गया।
कई राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें
तकनीकी जांच के दौरान जब्त मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों की पड़ताल की गई। जांच में सामने आया कि इन नंबरों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि इनका नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों में भी सक्रिय था। इस कार्रवाई में साइबर थाना देवघर के पुलिस निरीक्षक बिशेश्वर कुमार, सारठ थाना प्रभारी दीपक कुमार साह और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
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