Ranchi : झारखंड में विदेश में बैठकर अपराध का नेटवर्क चला रहे गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। कुख्यात अपराधी मयंक सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब ऐसे अन्य अपराधियों को भी विदेश से गिरफ्तार कर भारत लाने की कवायद तेज कर दी गई है। सीआईडी ने राज्य के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र भेजकर विदेश फरार अपराधियों की पूरी जानकारी मांगी है। इन अपराधियों की प्रोफाइल तैयार कर इंटरपोल को भेजी जाएगी, ताकि उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जा सके। सीआईडी द्वारा जारी प्रारूप में अपराधी का नाम, पिता का नाम, पासपोर्ट नंबर, हालिया रंगीन फोटो, दर्ज मामलों की संख्या, वर्तमान लोकेशन और उपलब्ध होने पर फिंगरप्रिंट की जानकारी देने को कहा गया है। यदि किसी जिले में ऐसा कोई अपराधी नहीं है तो इसकी भी सूचना मुख्यालय को देनी होगी। सीआईडी ने अपराधियों को चार श्रेणियों में बांटकर प्रोफाइल तैयार करने का निर्देश दिया है। पहली श्रेणी में आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े आरोपी शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में ड्रग्स और नारकोटिक्स तस्करी से जुड़े अपराधी रखे गए हैं। तीसरी श्रेणी आर्थिक अपराधियों की है, जबकि चौथी श्रेणी में साइबर अपराध, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल फरार अपराधियों को रखा गया है। जानकारी के अनुसार, विदेश में छिपे कई अपराधी अंतरराष्ट्रीय नंबरों के जरिए झारखंड के कारोबारियों को धमकी देकर रंगदारी वसूल रहे हैं। इनमें कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और राहुल सिंह के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, झारखंड के आधा दर्जन से अधिक अपराधी या उनके सहयोगी विदेश में रहकर गैंग का संचालन कर रहे हैं।
मालूम हो कि हाल ही में झारखंड पुलिस के सहयोग से अजरबैजान में गिरफ्तार किए गए मयंक सिंह को भारत लाया गया था। हालांकि उसकी गिरफ्तारी के बावजूद विदेश से रंगदारी मांगने और धमकी देने का सिलसिला पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी विदेश में बैठकर इंटरनेट कॉल और अंतरराष्ट्रीय नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। बताया जाता है कि दिवंगत गैंगस्टर अमन साहू ने सबसे पहले अपने नेटवर्क के लोगों को विदेश भेजकर रंगदारी कॉल करवाने की रणनीति अपनाई थी। बाद में मयंक सिंह को मलेशिया भेजा गया, जहां से उसने झारखंड के कारोबारियों को धमकी देने का काम शुरू किया। वर्तमान में कई अन्य अपराधी भी इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। झारखंड पुलिस का मानना है कि इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से विदेश में छिपे अपराधियों को गिरफ्तार कर भारत लाने में सफलता मिल सकती है। इससे राज्य में संगठित अपराध और रंगदारी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
Also Read : देवघर में नशे के बड़े नेटवर्क पर तीखी चोट, 76.19 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ 6 गिरफ्तार

