Hazaribagh : झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले हजारीबाग जिले के 59 हाई स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) प्रवीण रंजन ने इन स्कूलों के प्राचार्यों और संबंधित शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। साथ ही सभी से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इस बार मैट्रिक परीक्षा परिणाम में हजारीबाग जिला राज्यभर में 14वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले वर्ष जिला सातवें स्थान पर था। जिले की रैंकिंग में आई इस गिरावट को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है।
इन स्कूलों से मांगा गया जवाब
जिन स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और पीएमश्री स्कूल देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी और ढौठवा समेत कई अन्य स्कूल शामिल हैं। डीईओ प्रवीण रंजन ने कहा कि इन स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं। कई स्कूलों में तो एक ही विषय के दो-दो शिक्षक भी पदस्थापित हैं। इसके बावजूद रिजल्ट संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने बताया कि गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों में बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए हैं, जिससे स्कूलों का ओवरऑल रिजल्ट प्रभावित हुआ।
आज होगी मैट्रिक-इंटर रिजल्ट की समीक्षा
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह सोमवार को मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम की समीक्षा करेंगे। सचिव ने कहा कि कई जिलों के डीसी और डीईओ ने पहले ही खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के प्राचार्यों को शोकॉज नोटिस जारी किया है। उन्होंने बताया कि विभागीय बैठक में यह तय किया जाएगा कि किन बिंदुओं पर कार्रवाई की जाए। खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्राचार्यों और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वेतन रोकने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
शिक्षकों ने गिनाईं अपनी परेशानियां
हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग के शिक्षकों ने खराब रिजल्ट के पीछे कई कारण बताए हैं। शिक्षकों का कहना है कि आठवीं पास करने के बाद नौवीं में नामांकन के दौरान कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को भी प्रवेश देना पड़ता है ताकि इनरोलमेंट बढ़ सके। ऐसे कई छात्र बुनियादी लेखन तक सही ढंग से नहीं कर पाते। शिक्षकों ने यह भी कहा कि नौवीं कक्षा में सेंटअप टेस्ट बंद होने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी का सही आकलन नहीं हो पाता। छात्र सीधे मैट्रिक परीक्षा में शामिल हो जाते हैं।
इसके अलावा शिक्षकों ने गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि सालभर उन्हें चुनाव ड्यूटी, ट्रेनिंग, सावित्री बाई फुले योजना, बैंक खाता खुलवाने, आय प्रमाण पत्र भरवाने और जनगणना जैसे कार्यों में लगाया जाता है। इससे पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते।
शिक्षक संघ ने उठाई मांग
झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव रविंद्र कुमार चौधरी ने स्कूलों में फिर से सेंटअप टेस्ट शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखा जाए ताकि वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शैक्षणिक माहौल बेहतर बनाना जरूरी है।
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