Ranchi : रांची स्थित National University of Study and Research in Law के सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स की ओर से “किशोर न्याय प्रणाली के 10 वर्षों पर चिंतन” विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बाल अधिकार, कानून और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और देश में किशोर न्याय प्रणाली की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और आगे की जरूरतों पर खुलकर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने रखी अपनी बातें
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल और डीन ऑफ फैकल्टी प्रो. (डॉ.) के. श्यामला मौजूद रहे। इस दौरान कई विशेषज्ञों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी राय रखी। विशिष्ट पैनलिस्ट के तौर पर UNICEF झारखंड की चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट प्रीति श्रीवास्तव, बिकास कुमार श्रीवास्तव, आशित कुमार मोदी, रिमझिम वैश्णवी, डॉ. राजश्री वर्मा, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. उत्कर्ष वर्मा, शुभम श्रीवास्तव, सोनी भोला, डॉ. जूलियन सील पसारी और डॉ. रवींद्र कुमार पाठक शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 लागू होने के बाद कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिले हैं, लेकिन अब भी जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

बाल संरक्षण को मजबूत करने पर जोर
परामर्श कार्यक्रम में बाल संरक्षण, संस्थागत देखभाल और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पालन होना भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई कि कई मामलों में बच्चों को जरूरी कानूनी और सामाजिक सहायता समय पर नहीं मिल पाती। ऐसे में प्रशासन, न्याय व्यवस्था और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।
सुधार और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि बदलते सामाजिक हालात के साथ किशोर न्याय प्रणाली को लगातार अपडेट करने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि बाल मामलों से जुड़े अधिकारियों, संस्थानों और समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि सरकार, विधि विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा, तभी बाल अधिकारों की सही मायनों में रक्षा हो सकेगी।
सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न
कार्यक्रम के अंत में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और अधिक समावेशी तथा बाल केंद्रित न्याय प्रणाली बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के संवाद भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि किशोर न्याय व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।
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