सीमित संसाधन, लेकिन हौसला बड़ा
इन तीनों खिलाड़ियों की सफलता सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और बड़े सपनों की कहानी है। प्रशिक्षक करुणा पूर्ति का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इन बेटियों ने कभी हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास, कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण ने इन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तीन खिलाड़ियों की सफलता नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि झारखंड की धरती पर खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अगर सही मार्गदर्शन और मौका मिले तो यहां की बेटियां देश-दुनिया में नाम रोशन कर सकती हैं।
सरकारी स्कूल की बेटियां अब हर क्षेत्र में आगे
विद्यालय के प्राचार्य दीपक कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी जवाब है, जो मानते हैं कि बड़े मंच तक पहुंचने के लिए सिर्फ बड़े निजी संस्थानों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की सफलता बाकी छात्राओं के लिए भी प्रेरणा बनेगी और उन्हें बड़े सपने देखने का हौसला देगी।
निक्की प्रधान और ब्यूटी डुंगडुंग की राह पर नई पीढ़ी
बरियातू का यह प्रशिक्षण केंद्र पहले भी देश को कई बेहतरीन खिलाड़ी दे चुका है। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान निक्की प्रधान और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ब्यूटी डुंगडुंग भी इसी केंद्र से निकलकर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। अब नीलम, सुगन और खिली उसी राह पर आगे बढ़ रही हैं। यही वजह है कि बरियातू का यह प्रशिक्षण केंद्र अब झारखंड में महिला हॉकी की नई नर्सरी के रूप में पहचाना जाने लगा है। इन खिलाड़ियों की उपलब्धि अचानक नहीं आई है। इसी साल आयोजित सब जूनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में भी इन तीनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए झारखंड टीम को लगातार तीसरी बार खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके खेल ने पहले ही राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींच लिया था। अब ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारतीय टीम में चयन ने उनकी मेहनत पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।
बेटियों का सपना, सीनियर Team India की जर्सी
तीनों खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच करुणा पूर्ति, विद्यालय परिवार, शिक्षकों और साथियों को दिया है। उनका कहना है कि लगातार अभ्यास और सभी के सहयोग से ही वे यहां तक पहुंच सकी हैं। अब इनका अगला सपना भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना और तिरंगे का मान बढ़ाना है। यह कहानी सिर्फ तीन बेटियों की नहीं, बल्कि उन हजारों लड़कियों के सपनों की कहानी है जो छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों से निकलकर बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती हैं।
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