Bokaro : डीवीसी के कार्यकारी निदेशक (परिचालन) पी.पी. साह ने चंद्रपुरा पावर प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि ऐश पौंड की समस्या के कारण सीटीपीएस (CTPS) के बिजली उत्पादन पर कई तरह से असर पड़ रहा है। नियमित रूप से ऐश की ट्रांसपोर्टिंग न होने की वजह से पौंड भर गया है, जिससे संचालन में बाधा आ रही है। निदेशक ने बताया कि पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लांट का उत्पादन कम किया गया है। ऐश के उचित प्रबंधन के बिना उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं है, इसलिए सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों पर नाराजगी
उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को ऐश ट्रांसपोर्टिंग का काम दिया गया है, उनमें से दो कंपनियां काम नहीं कर रही हैं, जबकि एक कंपनी का काम भी काफी धीमा है। इस लापरवाही के कारण काफी मात्रा में ऐश पौंड से नहीं हट पाया है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही दोनों असंतोषजनक कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर एसओएस बेसिस पर नया काम भी दिया जा सकता है।
पौंड विस्तार और सुरक्षा कार्य
उन्होंने बताया कि फिलहाल ऐश पौंड के मेढ़ (बंड) को मजबूत और विस्तारित किया जा रहा है ताकि सुरक्षा बढ़ाई जा सके और क्षमता में सुधार हो सके। यह कार्य प्लांट की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। डीवीसी निदेशक ने जानकारी दी कि बी पौंड का निर्माण कार्य एक महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पौंड की क्षमता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। इस परियोजना के लिए पर्यावरण और ऊर्जा मंत्रालय से अनुमति लेकर काम आगे बढ़ाया गया है।
नई सुपर क्रिटिकल यूनिटों की योजना
उन्होंने यह भी बताया कि चंद्रपुरा में 800 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल यूनिटें लगाने की योजना पर डीवीसी गंभीरता से काम कर रहा है। इसके लिए कोयला, पानी और जमीन उपलब्ध है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। नई परियोजनाओं के लिए प्लांट क्षेत्र में चहारदीवारी निर्माण किया जाएगा और डीवीसी कर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था कर उन्हें शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही डीवीसी की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह योजना कोडरमा और रघुनाथपुर में भी लागू की जाएगी।