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    Home»झारखंड»हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था चरमराई : न किताबें मिली, न विकास कोष, शिक्षक अपनी जेब से चला रहे स्कूल
    झारखंड

    हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था चरमराई : न किताबें मिली, न विकास कोष, शिक्षक अपनी जेब से चला रहे स्कूल

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyApril 27, 2026Updated:April 27, 2026No Comments3 Mins Read
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    सरकारी स्कूलों
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    Hazaribagh : झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की हालत कुछ खास सुधरती नहीं दिख रही है। 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन बच्चों को अब तक किताबें समय पर नहीं मिल पाई हैं। वहीं, स्कूलों के संचालन के लिए जरूरी विद्यालय विकास कोष (School Development Fund) की राशि भी अब तक स्कूलों तक नहीं पहुंची है।

    शिक्षक खुद उठा रहे खर्च

    फंड नहीं मिलने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी शिक्षकों को हो रही है। कई स्कूलों में शिक्षक अपनी जेब से नामांकन पंजी और उपस्थिति पंजी खरीद रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने तो बताया कि उन्होंने स्कूल की जरूरी सामग्री जैसे चॉक, डस्टर और रजिस्टर तक अपने वेतन से खरीदे हैं। कई मामलों में एक शिक्षक ने 10 हजार रुपये तक खुद खर्च कर दिए हैं।

    1457 स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित

    जिले में कक्षा 1 से 8 तक कुल 1457 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में हर साल बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार की ओर से ग्रांट दी जाती है। इसी पैसे से स्कूलों में जरूरी शिक्षण सामग्री खरीदी जाती है और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाएं भी संभाली जाती हैं। लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि कई स्कूल “जुगाड़” के सहारे चल रहे हैं, और शिक्षक किसी तरह बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    समय पर नहीं आया विकास कोष

    नियम के मुताबिक विद्यालय विकास कोष की राशि हर साल मार्च में जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन 2025-26 सत्र का पैसा समय पर नहीं आया और लेप्स हो गया। वहीं 2026-27 सत्र शुरू होने के 24 दिन बाद भी राशि स्कूलों तक नहीं पहुंची है। शिक्षकों का कहना है कि इस बारे में कई बार शिकायत की गई, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं।

    क्या है विद्यालय विकास कोष?

    समग्र शिक्षा अभियान के तहत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद हर साल स्कूलों को यह फंड देता है।

    • 100 छात्रों तक: ₹25,000
    • 101 से 200 छात्रों तक: ₹50,000
    • 201 से 300 छात्रों तक: ₹75,000

    इस राशि से स्कूलों में पढ़ाई की सामग्री, साफ-सफाई, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की जाती है। कुल राशि स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के खाते में जाती है, जिसे शिक्षक और समिति मिलकर खर्च करते हैं। फंड और संसाधनों की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षक जैसे-तैसे व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन विभागीय देरी के कारण स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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