Ranchi : इस बार होलिका दहन की तारीख को लेकर लोगों में जबरदस्त कन्फ्यूजन बना हुआ है। कोई 2 मार्च कह रहा है तो कोई 3 मार्च को सही मान रहा है। ऊपर से चंद्रग्रहण की एंट्री ने मामला और उलझा दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर शास्त्रों के अनुसार सही तारीख और समय क्या है।
तिथि का पूरा गणित समझिए
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। यानी 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा मिल रही है, जो होलिका दहन के लिए जरूरी मानी जाती है।
2 मार्च को क्यों मानी जा रही है सही तारीख?
होलिका दहन प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। 2 मार्च को शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। लेकिन यहां एक पेंच है – 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है। शास्त्रों में भद्रा के दौरान होलिका दहन वर्जित माना गया है, खासकर भद्रा के मुख काल में। इसी वजह से भद्रा के मुख काल को छोड़कर भद्रा की पूंछ में, यानी रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट के बीच होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत होगा।
दूसरे मत क्या कहते हैं?
कुछ ज्योतिषाचार्यों का मत अलग है। हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिद्वार के पंडित मनोज त्रिपाठी का कहना है कि 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तो है, लेकिन उस समय भद्रा भी लगी रहेगी, जो शुभ नहीं मानी जाती। वहीं 3 मार्च को भद्रा नहीं है, लेकिन उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि समाप्त हो रही होगी। ऐसे में कुछ विद्वान 3 मार्च को भद्रा रहित समय में होलिका दहन करना ज्यादा उचित मान रहे हैं, भले ही प्रदोष काल न मिले।
3 मार्च को चंद्रग्रहण का असर
3 मार्च को साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और भारत में भी दिखाई देगा। सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में ग्रहण और सूतक काल के कारण 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा संभव नहीं होगी।
रंग वाली होली कब?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाती है। लेकिन इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की वजह से रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को खेली जाएगी। भारत के अलावा यह चंद्रग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। Johar Live इसकी सत्यता की गारंटी नहीं देता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले हमेशा किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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