Jamshedpur : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी आमतौर पर हाथियों और घने जंगलों के लिए जानी जाती है, लेकिन अब यहां मांसाहारी पौधों की मौजूदगी ने वैज्ञानिकों और वन विभाग को चौंका दिया है। हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में दलमा क्षेत्र में ड्रोसेरा बर्मानी नामक मांसाहारी पौधे पाए गए हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार, ये पौधे मिट्टी से नहीं बल्कि कीट, लार्वा और सूक्ष्म जीवों से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि झारखंड में मांसाहारी पौधों की संख्या पहले बहुत सीमित मानी जाती थी।
विशेषज्ञों ने बताया कि ये पौधे उन इलाकों में पनपते हैं, जहां मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। दलमा के कई हिस्सों की मिट्टी अम्लीय और नम है, जो ऐसे पौधों के लिए अनुकूल मानी जाती है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ये पौधे कीटों को आकर्षित कर उन्हें पकड़ते हैं और पाचन प्रक्रिया के जरिए पोषण प्राप्त करते हैं। मांसाहारी पौधे अपनी पत्तियों को जाल की तरह इस्तेमाल करते हैं। कुछ पौधों की सतह चिपचिपी होती है, जबकि कुछ में प्याले जैसी संरचना होती है, जिसमें कीट फंस जाते हैं। इससे न सिर्फ पौधों का अस्तित्व बना रहता है, बल्कि जंगल का पारिस्थितिक संतुलन भी मजबूत होता है।
मांसाहारी पौधों की खोज के बाद वन विभाग ने इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन से इन दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दलमा अब केवल पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। समय रहते संरक्षण के ठोस कदम उठाए गए तो आने वाले वर्षों में दलमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है।
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