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    Home»जोहार ब्रेकिंग»हथियारों के साए में कुचली गई जनसुनवाई, पुलिस की मौजूदगी में कानून हुआ बेबस… देखें वीडियो
    जोहार ब्रेकिंग

    हथियारों के साए में कुचली गई जनसुनवाई, पुलिस की मौजूदगी में कानून हुआ बेबस… देखें वीडियो

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJanuary 21, 2026No Comments3 Mins Read3
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    कोल
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    Hazaribagh (Barkagaon) : हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में एक निजी कोल परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हुई हिंसा ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित इस संवैधानिक प्रक्रिया को खुलेआम बाधित किया गया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यह सब पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हुआ। जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई के दौरान कुछ उपद्रवी ट्रैक्टरों पर सवार होकर मौके पर पहुंचे। उनके पास भाले, तीर, हसुआ जैसे हथियार थे। आरोप है कि उपद्रवियों ने पंडाल में घुसकर अफरा-तफरी मचाई, महिलाओं से बदसलूकी की और परियोजना के समर्थक ग्रामीणों के साथ मारपीट की। कई लोग घायल हो गए।

    इस घटना के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्थिति का सही आकलन किया गया होता और पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए होते, तो हिंसा को रोका जा सकता था। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या खुफिया एजेंसियों से कोई इनपुट नहीं मिला था, और यदि मिला था तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    https://www.joharlive.com/wp-content/uploads/2026/01/vid.mp4

    जनसुनवाई लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है, जहां लोग अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सकते हैं। इसे हिंसा के बल पर रोकना संविधान और कानून के शासन पर सीधा हमला माना जा रहा है। यदि इस दौरान किसी की जान चली जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती, यह सवाल भी अब उठ रहा है।

    नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि बड़कागांव की घटना राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को दिखाती है। उनके अनुसार प्रशासन की ढिलाई ने असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ाया है।

    स्थानीय जानकारों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले से ही अवैध कोयला कारोबार, बालू तस्करी और अवैध भट्ठों से जुड़े लोगों की सक्रियता रही है। ऐसे तत्व अक्सर विकास परियोजनाओं का विरोध करते हैं। लेकिन इन पर समय रहते सख्त कार्रवाई न होना प्रशासन की कमजोरी को दर्शाता है। अब सवाल यह नहीं है कि कोई परियोजना के पक्ष में है या विरोध में। असली सवाल यह है कि क्या हिंसा को असहमति का जरिया बनने दिया जाएगा। यदि ऐसा हुआ, तो जनसुनवाई और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

    इस घटना के बाद मांग की जा रही है कि दोषियों की पहचान कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए। साथ ही, लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में होने वाली जनसुनवाइयों के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस घटना से सबक नहीं लिया, तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं, जिससे राज्य की प्रशासनिक साख पर और बड़ा सवाल खड़ा होगा।

    Also Read : निजी कोल कंपनी की जनसुनवाई में हिं’सा, पंडाल में घुसकर मा’रपीट, लाखों की तोड़-फोड़

    law rendered helpless in the presence of the police... Watch the video. Public hearing crushed under the shadow of weapons कोल पुलिस की मौजूदगी में कानून हुआ बेबस... देखें वीडियो हथियारों के साए में कुचली गई जनसुनवाई
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