जोहार लाइव ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार 15 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नौ नेताओं की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी गई है.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया. नोटिस जारी करते हुए सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा, “हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछेंगे.”
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, शरद पवार गुट की एनसीपी की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं. बाद में विपक्ष के दो अन्य नेताओं, वीसीके अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सज्जाद अहमद किचलू ने भी नेता प्रतिपक्ष की याचिका में अपना नाम शामिल कराया.
यह याचिका कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की ओर से SIR प्रक्रिया के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है.
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में SIR प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने, निर्णय लेने की प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने और निर्वाचन कानूनों के अनुपालन के साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है. प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
SIR से संबंधित पूरी फाइल पेश की जाए: निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 के उस फैसले से संबंधित सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएं, जिसके तहत SIR शुरू करने का निर्णय लिया गया था.
निर्णय की वैधानिकता की जांच हो: यह जांच की जाए कि लिए गए फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 और टीएन शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप हैं या नहीं. याचिका में कानूनी अधिकार के बिना लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग भी की गई है.
निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएं: मामले के लंबित रहने तक SIR से जुड़े सभी फैसले सामूहिक रूप से लेने और उनका विधिवत रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया जाए.
ऑनलाइन फॉर्म-6 नियमों के अनुरूप हो: ऑनलाइन फॉर्म-6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया जाए, जब तक कि इन नियमों में संशोधन नहीं किया जाता.
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बने: सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित कर मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और ईवीएम से जुड़ी प्रक्रियाओं का ऑडिट कराया जाए। इसमें वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की समीक्षा भी शामिल हो.
हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक हो: बूथवार उन मतदाताओं के नाम प्रकाशित किए जाएं, जिन्हें सूची से हटाया गया है. नाम हटाने के कारण, उम्र और लिंग के आधार पर आंकड़े भी जारी किए जाएं. साथ ही नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए.
सुनवाई के बिना नाम न हटे: किसी भी मतदाता का नाम नोटिस दिए बिना और सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए. पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में पात्र लोगों को आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की अनुमति देने की मांग भी की गई है.
SIR प्रक्रिया पर रोक लगे: याचिका पर अंतिम फैसला आने तक सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया स्थगित की जाए.
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