नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब में नेहा बोरा और अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए. इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज भी मौजूद रहे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, हिरासत में लिए जाने, कैमरे छीने जाने और SIR के खिलाफ चल रहे आंदोलन का मुद्दा उठाया गया.
नेहा बोरा ने कहा कि पत्रकारों के हाथ में प्रेस कार्ड होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि क्विंट और कारवां के पत्रकारों के साथ मारपीट की गई और उन्हें घंटों तक हिरासत में रखा गया. पत्रकारों के हाथों से कैमरे छीन लिए गए और उनसे कहा गया कि अगर वे इस घटना को कवर करेंगे, तो उन्हें कैमरे वापस नहीं मिलेंगे.
उन्होंने एक महिला पत्रकार का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब वह पुलिसकर्मी द्वारा कथित उत्पीड़न के मामले में FIR दर्ज कराने पहुंचीं, तो अगले दिन उनके खिलाफ ही FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई.
नेहा बोरा ने कहा कि जब आम जनता न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास पहुंचती है, तो पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए. लेकिन उनके मुताबिक, पुलिस एक खास पार्टी का साथ देते हुए जनता के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.
कविता के जरिए आंदोलन का संदेश
नेहा बोरा ने अपनी बात रखते हुए रश्मि रति की कविता की पंक्तियां भी सुनाईं, “जंजीर बढ़ाकर साथ मुझे, हां हां दुर्योधन बांध मुझे.”
उन्होंने कहा कि वोटर राइट्स के लिए और SIR के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से जुड़े आंदोलन का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में यह आंदोलन चल रहा है.
अभिजीत दीपके ने नरेंद्र मोदी सरकार पर लगाए आरोप
अभिजीत दीपके ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार किसी की बात नहीं सुन रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार ने सिस्टम की पूरी मशीनरी लगा दी है.
उन्होंने कहा कि पिछले 10-15 दिनों से विभिन्न छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लोगों को घसीटकर ले जाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नेता प्रतिपक्ष (LOP) को भी हिरासत में लिया गया. इसके अलावा कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया.
अभिजीत दीपके ने 10 अक्टूबर के आंदोलन के आह्वान का जिक्र करते हुए दावा किया कि रेलवे और मेट्रो सेवाओं को बंद किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुलाया गया.
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था क्यों की जा रही है और नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें बचाने में इतनी सक्रिय क्यों है.
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अपने ही देश के लोगों के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पूरी दिल्ली को ठप कर दिया गया और सीमाओं जैसी स्थिति बना दी गई.
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में यह संदेह क्यों न किया जाए कि ज्ञानेश कुमार चुनाव जिताने में नरेंद्र मोदी की मदद कर रहे हैं. उन्होंने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका इस्तीफा तुरंत ले लिया गया था, जबकि मौजूदा मामले में अलग रवैया अपनाया जा रहा है.
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