भारतीय क्रिकेट में ‘दादा’ का नाम लेते ही सबसे पहले सौरव गांगुली की छवि सामने आती है.अपनी बेखौफ कप्तानी, शानदार बल्लेबाजी और दमदार व्यक्तित्व के दम पर उन्होंने यह पहचान बनाई. मैदान पर अगर कोई विरोधी खिलाड़ी उनसे उलझता या स्लेजिंग करता, तो गांगुली उसका जवाब सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि अपने बल्ले से भी देते थे. उन्होंने भारतीय टीम में ऐसा आत्मविश्वास भरा कि विदेशों में जीत अब सपना नहीं, बल्कि लक्ष्य बन गई. खासकर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनका आक्रामक अंदाज देखने लायक होता था. बड़े-बड़े छक्के लगाकर वे गेंद को स्टेडियम की सीमाओं के पार पहुंचा देते थे.
भले ही सौरव गांगुली अपनी कप्तानी में भारत को आईसीसी ट्रॉफी नहीं दिला सके, लेकिन उन्होंने जिस मजबूत टीम की नींव रखी, उसी पर आगे चलकर भारतीय क्रिकेट ने विश्व क्रिकेट में अपना दबदबा कायम किया. उन्होंने कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम किए, जो आज भी बरकरार हैं और नई पीढ़ी के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं. 8 जुलाई को भारतीय क्रिकेट के इस महान कप्तान ने अपने जीवन के 54 वर्ष पूरे कर लिए.
सौरव गांगुली का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ, लेकिन उन्होंने आराम की जिंदगी छोड़कर क्रिकेट को अपना करियर बनाया. शुरुआत में उन्हें फुटबॉल पसंद था, लेकिन बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली की प्रेरणा से उन्होंने क्रिकेट चुना. जल्द ही बंगाल की टीम में जगह बनाई और फिर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे.
1996 में इंग्लैंड दौरे पर सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स टेस्ट में अपने डेब्यू मैच में शानदार 131 रन बनाए. इसके बाद अगले टेस्ट में भी शतक जड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है.
वनडे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की जोड़ी दुनिया की सबसे सफल सलामी जोड़ियों में शामिल रही. दोनों ने मिलकर हजारों रन बनाए और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. गांगुली की कवर ड्राइव और ऑफ साइड के शॉट्स आज भी क्रिकेट प्रेमियों की यादों में बसे हुए हैं.
साल 2000 में मैच फिक्सिंग विवाद के बाद जब भारतीय क्रिकेट मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब सौरव गांगुली को कप्तानी सौंपी गई. उन्होंने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और टीम में लड़ने का जज्बा पैदा किया. उनकी कप्तानी में भारत ने विदेशों में जीतना सीखा और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों को कड़ी चुनौती दी.
सौरव गांगुली ने कई ऐसे खिलाड़ियों को मौका दिया जो आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नाम बने. इनमें शामिल हैं- एमएस धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान, इरफान पठान, आशीष नेहरा. इन खिलाड़ियों ने बाद में भारत को टी20 विश्व कप और वनडे विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई.
भारतीय क्रिकेट के सुनहरे पल
2001: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती. कोलकाता टेस्ट में फॉलोऑन के बाद मिली जीत ने दुनिया को दिखा दिया कि टीम इंडिया अब किसी भी हालात में वापसी कर सकती है.
2002: लॉर्ड्स की बालकनी में ऐतिहासिक जश्न
13 जुलाई 2002 को इंग्लैंड को हराकर नेटवेस्ट ट्रॉफी जीतने के बाद गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराकर जीत का जश्न मनाया. यह पल भारतीय क्रिकेट के बदले हुए आत्मविश्वास और आक्रामक सोच की पहचान बन गया.
2003: टीम इंडिया को विश्व कप फाइनल तक पहुंचाया
गांगुली की कप्तानी में भारत 2003 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुं चा. हालांकि खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से हार मिली, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने विश्व क्रिकेट में उसकी नई पहचान बनाई.
शानदार आंकड़े
- टेस्ट मैच: 113
- रन: 7,212
- शतक: 16
- वनडे मैच: 311
- रन: 11,363
- शतक: 22
- अंतरराष्ट्रीय रन: 18,000 से ज्यादा
कप्तानी के बड़े रिकॉर्ड
- भारत के सबसे सफल कप्तानों में शामिल
- विदेशों में कई ऐतिहासिक टेस्ट जीत
- 2003 विश्व कप फाइनल तक टीम को पहुंचाया
- भारतीय क्रिकेट में आक्रामक सोच की शुरुआत की
संन्यास के बाद सौरव गांगुली ने कमेंट्री, आईपीएल और क्रिकेट प्रशासन में अहम भूमिका निभाई. 2019 से 2022 तक वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष रहे. उनके कार्यकाल में घरेलू क्रिकेट, महिला क्रिकेट और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए.
क्यों खास हैं ‘दादा’?
सौरव गांगुली सिर्फ एक बल्लेबाज या कप्तान नहीं थे. उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी. खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाया, विदेशों में जीतने का जज्बा पैदा किया और ऐसी टीम तैयार की जिसने आगे चलकर 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जैसी बड़ी सफलताएं हासिल कीं.
आज भी जब भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों की बात होती है, तो सौरव गांगुली का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. ‘दादा’ ने भारतीय क्रिकेट को सिर्फ जीतना नहीं सिखाया, बल्कि दुनिया की आंखों में आंखें डालकर खेलना भी सिखाया.
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