किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराने के लिए झारखंड में प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे. साथ ही गांवों में सामूहिक उपयोग के लिए पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनाने की पहल होगी. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बुधवार को नेपाल हाउस स्थित सचिवालय में भूमि संरक्षण निदेशालय की समीक्षा बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए.
बैठक में बड़े ट्रैक्टरों पर मिलने वाली सब्सिडी 50 प्रतिशत से बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया. मंत्री ने निदेशालय के अधिकारियों के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर जारी करने का निर्देश भी दिया.
छोटे किसानों को नहीं खरीदनी पड़ेंगे कृषि यंत्र
कस्टम हायरिंग सेंटर से खासकर छोटे और सीमांत किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की मजबूरी से राहत मिलेगी. वहीं, पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनने से किसानों को धान की मिसाई, गेहूं की मड़ाई और मड़ुवा की कुटाई के लिए साझा एवं उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो सकेगा.
उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त को आयोजित स्टेट लेवल वर्कशॉप एवं ट्रेनिंग ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम में मंत्री ने भूमि संरक्षण पदाधिकारियों से विभागीय योजनाओं में सुधार के लिए लिखित सुझाव मांगे थे. समीक्षा बैठक में इन सुझावों पर चर्चा की गई.
मंत्री ने अधिकारियों को किसानों की जमीनी जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया. बैठक में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी और भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार उपस्थित रहे.

