Patna : राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार की सियासत में बैठकों का दौर जारी है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने फॉर्मूले को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एनडीए की तरफ से 14 और 15 मार्च को खास बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिसमें राज्यसभा की पांचों सीट पर जीत की रणनीति तय की जाएगी।
एनडीए की दो दिवसीय रणनीति बैठक
14 मार्च को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर बैठक होगी। इसके अगले दिन 15 मार्च को जदयू के वरिष्ठ नेता और संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी के आवास पर अंतिम रणनीतिक बैठक होगी। एनडीए के सभी विधायकों और विधान पार्षदों को कहा गया है कि वे पटना में ही रहें और मतदान के बाद ही कहीं जाएं।
डिप्टी सीएम के घर हुई बैठक
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर भी बैठक हुई। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, हम के वरिष्ठ नेता संजय सुमन, लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, रालोमो की विधायक स्नेहलता, विधान पार्षद रविंद्र सिंह और विधायक शालिनी मिश्रा समेत अन्य नेता शामिल थे। इस दौरान सर्वसम्मति से सभी पांच एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में वोट देने का निर्णय लिया गया।
महागठबंधन की रणनीति
महागठबंधन भी जीत को लेकर सक्रिय है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने आवास पर घटक दलों के नेताओं से लगातार बैठक कर रहे हैं। इससे पहले अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक को उन्होंने ‘पॉजिटिव’ बताया और कहा कि अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लेंगे।
राज्यसभा की पांचवीं सीट पर टकराव
राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर दोनों गठबंधनों में रणनीतिक मंथन चल रहा है। जीत के लिए कुल 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, और उसे उम्मीद है कि एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक के समर्थन से उनका उम्मीदवार जीत सकेगा।
सियासी समीकरण और भविष्य
पटना में हो रही इन बैठकों ने यह साफ कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार की सियासत में हलचल तेज है। आने वाले दिनों में दोनों गठबंधनों की रणनीतियों और समीकरणों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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