जोहार लाइव ब्यूरो
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है.
सुप्रीम कोर्ट के उपलब्ध केस स्टेटस के अनुसार, याचिका का डायरी नंबर 64196/2026 है. इसे 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4:37 बजे दाखिल किया गया. रिकॉर्ड में याचिका की स्थिति लंबित (PENDING) दर्ज है. इसका CNR नंबर SCIN010641962026 है और मामला सेक्शन I-B में दर्ज है.
याचिका में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, माकपा के एम. ए. बेबी, भाकपा के डी. राजा, झामुमो की महुआ माझी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर याचिकाकर्ता हैं.
निर्वाचन आयोग और तीन निर्वाचन आयुक्त प्रतिवादी
उपलब्ध केस रिकॉर्ड में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है.
यह याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है, जब विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है. निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि गलत तरीके से नाम हटने की स्थिति में मतदाता दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं.
मुख्य न्यायाधीश से मिलने की मांग भी ठुकराई गई
याचिका दाखिल करने से पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की मांग की थी. इंडिया टुडे की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित मुद्दे पहले से न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए.
इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उठाने की पहल की. विपक्ष की मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसे मुद्दे भी शामिल रहे.

