Johar Live Desk : PM नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन यात्रा पर पहुंचे हैं। वे 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात की संभावना
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। पिछले साल अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में आधार तैयार किया था।
SCO शिखर सम्मेलन का एजेंडा
2001 में स्थापित SCO के 10 सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। इस साल का सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है। भारत ने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने कहा, “SCO का लक्ष्य आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से लड़ना है। भारत चाहता है कि सभी सदस्य देश इस मुद्दे पर एकजुट होकर साझा बयान जारी करें।”
अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक मंच
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल और हथियारों की खरीद के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। ब्रिक्स देशों पर भी ट्रंप के निशाने के बीच यह SCO समिट वैश्विक मंच पर अमेरिकी नीतियों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत, चीन और रूस को वैश्विक दक्षिण के हितों को बढ़ावा देने का अवसर देगा।
चीन का स्वागत
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “चीन पीएम मोदी का SCO समिट में स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि यह सम्मेलन दोस्ती, एकता और सहयोग का प्रतीक बनेगा।”
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