Bokaro : बोकारो जिला के बेरमो कोयलांचल में मजदूरों ने एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल में भाग लिया। संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के बैनर तले यह बंद रखा गया। हड़ताल के चलते कोलियरियों के सभी प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद हैं। नतीजतन, न सिर्फ कोयला उत्पादन ठप है बल्कि कोयले का ट्रांसपोर्ट भी रुका हुआ है। मजदूर संगठनों के नेता और कर्मचारी परियोजना पर पहुंचे और बंद का समर्थन करते हुए जोरदार नारेबाजी की।
मजदूरों की नाराजगी : ‘फॉर लेबर कोड’ को लेकर
मजदूर यूनियन के नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लाए गए नए ‘फॉर लेबर कोड’ से मजदूरों के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे। पहले मजदूरों के हित में बनाए गए कानून धीरे-धीरे रद्द कर दिए गए हैं। अब नए कानून के लागू होने (1 अप्रैल 2026 से) से सरकार मजदूरों के हक पर रोक लगा रही है।
लीडर्स का कहना है कि कोलियरियों में रोज़ाना दुर्घटनाएं होती हैं और कई बार लोगों की जान चली जाती है। ऐसे मामलों में पुराने कानून के तहत मजदूर के आश्रित को तुरंत नियुक्ति मिलती थी, या जब कर्मचारी काम करने में अस्वस्थ होता था, तो उसके स्थान पर आश्रित को नियुक्त किया जाता था। लेकिन नए कोड के आने से ये अधिकार पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं।
हड़ताल में कौन-कौन शामिल हैं
कोल इंडिया की अनुषांगिक इकाई सीसीएल के ढोरी एरिया, एरिया एकाउंट ऑफ़िस, एरिया सेल ऑफ़िस, ढोरी जीएम ऑफिस, महिला क्लब ढोरी, बोकारो और करगली एरिया, खास महल प्रोजेक्ट, कारो प्रोजेक्ट एवं कथारा एरिया के गोविंदपुर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी आज हड़ताल में शामिल हैं। इंटक, एटक, एचएमएस और सीटू के कार्यकर्ताओं ने झंडे, पोस्टर और बैनर लगाकर हड़ताल का समर्थन किया।
सीटू के केंद्रीय सचिव विजय भोई ने चेताया कि इस कानून के लागू होने से राज्य में औद्योगिक अशांति बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करना पड़ेगा और हड़ताल करने का अधिकार खत्म हो जाएगा। साथ ही जेबीसीसीआई को भी समाप्त कर दिया जाएगा।
बीएमएस का रुख
नेताओं ने बताया कि इस बंद में सिर्फ बीएमएस यूनियन शामिल नहीं है। हालांकि, उनका नैतिक समर्थन बंद के साथ है। बताया जा रहा है कि बीएमएस सरकार का सहयोगी यूनियन है, इसलिए वह सीधे तौर पर हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहा।
जनता मजदूर संघ की राय
हड़ताल में शामिल जनता मजदूर संघ के सचिव संतोष कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार से उनकी कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी था। उनका कहना था कि ‘फॉर लेबर कोड’ लागू करना मजदूरों की अनदेखी और उनके अधिकारों का हनन है।
प्रबंधन का कहना
बोकारो और करगली के महाप्रबंधक एसके झा ने कहा कि सभी परियोजनाओं में काम आउटसोर्सिंग के जरिए चल रहा है। उन्होंने बताया कि यूनियन के सदस्यों से बातचीत करके काम पर वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। नुकसान का आकलन अभी करना मुश्किल है।
हड़ताल में शामिल प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ता
कार्यक्रम में जेबीसीसीआई के सदस्य, जनता मजदूर संघ के ओम प्रकाश सिंह, संतोष कुमार, इंटक के सुबोध सिंह (क्षेत्रीय सचिव बी एंड के), आर उनेश, राजू भुखिया, धीरज पाण्डेय, शरत कुमार, भीम महतो, राजु रविदास, जवाहरलाल यादव, शिवनंदन चौहान, गोवर्धन रविदास, कुंज बिहारी प्रसाद, विकास कुमार, मनसुख कालिंदी, सुभाष महतो, महेंद्र चौधरी और नरेश महतो समेत कई लोग शामिल थे।
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