नवरात्रि की महाअष्टमी मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना का विशेष दिन है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी शांति, पवित्रता और सुख-समृद्धि की प्रतीक हैं. इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने, नारियल का भोग लगाने और कन्या पूजन करने का विशेष महत्व है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इन्होंने कठोर तपस्या की थी. हजारों वर्षों की धूप, धूल और ठंड के कारण इनका शरीर काला पड़ गया था. इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने इन पर गंगाजल छिड़का, तब इनका रूप अत्यंत कांतिमय और गौर हो गया. तभी से इनका नाम ‘महागौरी’ पड़ा.
मान्यता है कि सच्चे मन से मां महागौरी की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि, प्रमुख मंत्र और आरती.

मां महागौरी की पूजा विधि
1. स्नान और संकल्प: महाअष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इस दिन सफेद या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. इसके बाद मां दुर्गा का स्मरण करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें.
2. मां की प्रतिमा स्थापना और ध्यान: पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और श्रद्धापूर्वक उनका ध्यान करें.
3. विधि-विधान से पूजन: मां महागौरी को जल, पाद्य, आचमन और स्नान अर्पित करें. इसके बाद कुमकुम, सिंदूर, रोली और चंदन से तिलक लगाएं. मां को सफेद फूल, जैसे चमेली और सफेद गुलाब अर्पित करें. इसके बाद धूप-दीप जलाकर पूजा करें.
4. नारियल का भोग लगाएं: मां महागौरी को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करें.
5. आरती और कन्या पूजन: पूजा के अंत में घी के दीपक या कपूर से मां महागौरी की आरती उतारें. महाअष्टमी पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है. इस परंपरा में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है. परंपरा के अनुसार, पांच, सात, नौ या 11 कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जा सकता है.
मां महागौरी के प्रमुख मंत्र
महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है.
ध्यान मंत्र
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः.
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
मां महागौरी का मूल मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः.
प्रार्थना मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके.
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते.
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा, मंत्र जाप और आरती के साथ भक्त मां से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं.
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