Johar Live Desk: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद (ए) के अध्यक्ष अरशद मदनी के उस दावे पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कभी उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सरमा को चुनावी टिकट न देने की मांग की थी।
हाल ही में एक सभा में मदनी ने दावा किया था कि उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में चेताया था कि सरमा “आरएसएस मानसिकता” रखते हैं, इसलिए उन्हें टिकट न दिया जाए।
सरमा ने कहा कि मदनी 2011 से ही उनके खिलाफ शिकायतें करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “2011 में जब मैं शिक्षा मंत्री बना, तब मदनी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से कहा था कि TET शिक्षकों की भर्ती रोक दी जाए, लेकिन मैंने इसे रोकने के बजाय आगे बढ़ाया। तभी से मदनी मेरे खिलाफ हो गए। कांग्रेस में मदनी जैसे लोग हैं जो असम को कमजोर करने का काम करते हैं। उन्होंने कितने टिकट बांटे, किसी को पता नहीं, लेकिन आज उनकी कोई सुनता भी नहीं है।”
इस विवाद पर असम कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, “कांग्रेस के फैसले कभी मदनी जैसे लोगों से प्रभावित नहीं हुए। जब सरमा कांग्रेस में थे, तब वे मदनी और अजमल जैसे लोगों के साथ मिलकर काम करते थे। मदनी को असम के मामलों में दखल देने का कोई हक नहीं है।”
सरमा ने आगे दावा किया कि 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले मदनी की विचारधारा से जुड़े लोग राज्य को अस्थिर करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “मदनी एक समय में हीरो थे, लेकिन अब शून्य हो चुके हैं। वे हमेशा बीजेपी का विरोध करेंगे। हर्ष मंदर जैसे लोग या शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े लोग भी इसी तरह विरोध करेंगे। वे मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकते, लेकिन गलत हरकतों की कोशिश ज़रूर कर सकते हैं। हमारे पास इनके पीछे छिपे स्रोतों के खिलाफ दीर्घकालिक रणनीति है और हम उस पर सख्ती से काम करते रहेंगे।”