Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»देश के सभी हाईकोर्ट में भगवा समूह के जज बैठे हैं, ऐसे विचार वाले आसानी से जज बनाए जा रहे हैः पूर्व जस्टिस के चंद्रू
    जोहार ब्रेकिंग

    देश के सभी हाईकोर्ट में भगवा समूह के जज बैठे हैं, ऐसे विचार वाले आसानी से जज बनाए जा रहे हैः पूर्व जस्टिस के चंद्रू

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 13, 2026No Comments4 Mins Read3
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    जोहार लाइव ब्यूरो

    मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के चंद्रू के बयान से एक बार फिर न्यायिक व्यवस्था, जजों की नियुक्ति प्रक्रिया और उसक वर्तमान मोदी सरकार के नियंत्रण की पोल खोल कर रख दी है.

    चंद्रू के अनुसार, यदि किसी खास विचारधारा से जुड़े व्यक्ति का नाम नियुक्ति के लिए भेजा जाता है, तो उस सूची को आसानी से मंजूरी मिल जाती है, जबकि अन्य नामों पर फैसला अटका रहता है.

    उन्होंने कहा, “भगवाकरण बढ़ रहा है. हर हाईकोर्ट में उस भगवा समूह से जुड़ा एक व्यक्ति मौजूद है. ऐसा कैसे हुआ? क्या वे बहुत बड़ी संख्या में मुकदमों का प्रतिनिधित्व करते हैं या असाधारण रूप से प्रतिभाशाली हैं? मैं आज कह रहा हूं कि एक अलिखित मानक प्रक्रिया (SOP) है. अगर आप भगवा समूह से जुड़े हैं, तो आपकी सूची आगे बढ़ जाएगी, अन्यथा आपकी सूची रोक दी जाएगी और लगातार अटकी रहेगी.”

    जस्टिस के. चंद्रू ने ये बातें बीते रविवार 11 अक्टूबर को चेन्नई के एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म की ओर से आयोजित ‘हू विल जज द जजेज’ (न्यायाधीशों का फैसला कौन करेगा?) विषय पर आयोजित परिचर्चा में कहीं. यहां वो ‘जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम एक संवैधानिक तख्तापलट है’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे.

    चंद्रू ने कहा कि 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद मौजूदा केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि फैसले के आधार को दूर करने के लिए कानून में संशोधन करने के बजाय सरकार ने एक तरह के ‘लेन-देन वाले समझौते’ का रास्ता चुना, जिसके तहत कुछ मानदंडों के आधार पर अनुशंसित जजों की नियुक्ति की जा सकती थी.

    जस्टिस चंद्रू ने कहा, “अब आप मुझसे पूछ सकते हैं कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद मोदी संसद में जाकर कानून में संशोधन क्यों नहीं लाए. किसी फैसले को सीधे पलटा नहीं जा सकता, लेकिन उस फैसले के आधार को बदला जा सकता है. अगर आप कहते हैं कि तीन सदस्यों के बीच संतुलन समान नहीं है, तो इसे सात सदस्यीय बनाया जा सकता है, जिसमें 4:3 का अनुपात हो. इसके बावजूद आयोग बनाया जा सकता था. लेकिन उन्होंने संसद में जाकर एक और संशोधन लाने और स्थायी नियुक्ति आयोग बनाने का विकल्प नहीं चुना.”

    सुप्रीम कोर्ट के सभी जज मोदी सरकार के नियुक्त किए हुए हैं

    उन्होंने आगे कहा, “2014 से 2026 तक, पिछले तीन कार्यकालों में देखें तो आज सुप्रीम कोर्ट में 37 जज हैं और इन सभी 37 जजों की नियुक्ति मोदी के कार्यकाल में हुई है.”

    जस्टिस चंद्रू ने कहा, “अगर मोदी 37 जजों की नियुक्ति कर सकते हैं और आराम से काम कर रहे हैं, तो उन्हें राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की चिंता क्यों होगी? मौजूदा व्यवस्था उनके लिए ज्यादा बेहतर है. मैंने अपनी किताब में लिखा है कि पर्दे के पीछे होने वाला यह गठजोड़ और लेन-देन, NJAC जैसी व्यवस्था से ज्यादा फायदेमंद है. NJAC में नियुक्ति के लिए वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन होता और प्रक्रिया पारदर्शी रहती. कुछ भी गोपनीय नहीं रहता. इसलिए मोदी को यह गुप्त लेन-देन वाली व्यवस्था ज्यादा बेहतर लगती है.”

    जस्टिस चंद्रू ने जस्टिस विक्टोरिया गौरी की नियुक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुले तौर पर बयान देने के बावजूद उनकी नियुक्ति आसानी से हो गई. वहीं, अधिवक्ता जॉन सत्यन की नियुक्ति को अब तक मंजूरी नहीं मिली, जबकि कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश दोहराई थी.

    न्यायिक नियुक्तियों में अन्य विकल्पों की अनदेखी

    जस्टिस चंद्रू ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिससे देश के हर नागरिक का सरोकार होना चाहिए. यह ऐसा विषय नहीं है, जिस पर केवल कुछ लोग आवाज उठाएं.

    उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को ‘संविधान के पीछे के दरवाजे से नियुक्तियां करने वाला तख्तापलट’ करार देते हुए कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसका संबंध देश के हर व्यक्ति से है. हमें इस मुद्दे को उठाना होगा. सबसे पहले, हमें अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए.

    दूसरा, जब संविधान किसी खास तरीके का प्रावधान नहीं करता, तो पीछे के दरवाजे से उस तरीके को कैसे लागू किया जा सकता है? इसी को हम संवैधानिक तख्तापलट कहते हैं. यह एक संवैधानिक तख्तापलट है.”

    Also Read : झारखंड : रिम्स में मरीजों और एंबुलेंस को जाम से मिलेगी राहत, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने का प्रस्ताव

    High Courts Judicial Appointments judiciary Legal News Politics Supreme Court
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleझारखंड : धालभूमगढ़ में ओझा-गुनी और तंत्र-मंत्र के शक में भाई ने की दो सगी बहनों की कुल्हाड़ी से हत्या
    Next Article झारखंड: साल 2004 से कभी जीत नहीं पाए चुनाव, अब सीधे बने राज्यपाल, जानिये ब्रजमोहन राम का पूरा पॉलिटिकल करियर क्या रहा

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    कर्नाटक : हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत सीमा SC-ST का बढ़ा आरक्षण रद्द, सिद्धारमैया ने भाजपा को घेरा

    October 13, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: साल 2004 से कभी जीत नहीं पाए चुनाव, अब सीधे बने राज्यपाल, जानिये ब्रजमोहन राम का पूरा पॉलिटिकल करियर क्या रहा

    October 13, 2026
    क्राइम

    झारखंड : धालभूमगढ़ में ओझा-गुनी और तंत्र-मंत्र के शक में भाई ने की दो सगी बहनों की कुल्हाड़ी से हत्या

    October 13, 2026
    क्राइम

    झारखंड : बुढ़मू में गोलीबारी और लोडर में आगजनी, राहुल दुबे गैंग के नाम से धमकी भरी चिट्ठी जारी

    October 13, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: गिरिडीह में मिले तांबा, जस्ता और सीसा के भंडार, खनन की नई संभावनाएं

    October 13, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जोहार शक्ति शृंखला भाग-3: दिहाड़ी मजदूर मां की एशियन चैंपियन बेटी, कहानी दीपिका सोरेंग की

    October 13, 2026
    Latest Posts

    झारखंड : तीन साल से कोई नया केस नहीं, फिर भी रांची से किया गया था जिला बदर, हाईकोर्ट ने आदेश किया रद्द

    October 13, 2026

    झारखंड : नशा सिर्फ कानून व्यवस्था की नहीं, परिवार और समाज के भविष्य जुड़ा का गंभीर मुद्दा है – उमाशंकर सिंह

    October 13, 2026

    कर्नाटक : हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत सीमा SC-ST का बढ़ा आरक्षण रद्द, सिद्धारमैया ने भाजपा को घेरा

    October 13, 2026

    झारखंड: साल 2004 से कभी जीत नहीं पाए चुनाव, अब सीधे बने राज्यपाल, जानिये ब्रजमोहन राम का पूरा पॉलिटिकल करियर क्या रहा

    October 13, 2026

    देश के सभी हाईकोर्ट में भगवा समूह के जज बैठे हैं, ऐसे विचार वाले आसानी से जज बनाए जा रहे हैः पूर्व जस्टिस के चंद्रू

    October 13, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.