मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है, जहां सभी लोग सरकार से सहमत हों, बल्कि वह है, जहां हर नागरिक को सरकार से सवाल पूछने की आजादी हो. यह बातें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कही. उन्होंने युवा वकीलों से संविधान की रक्षा करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और आम लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की.
डीके शिवकुमार शनिवार, 17 अक्टूबर को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे. ज्ञान ज्योति ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने चुनौतियां हैं. ऐसे में युवा वकीलों और नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है.
उन्होंने कहा, “एक मजबूत लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने की आजादी होनी चाहिए. सवाल पूछना कभी बंद न करें, अपने मूल्यों से समझौता न करें और लोगों को कभी न भूलें.”

न्यायिक सेवा के लिए बनेगा संस्थान
डीके शिवकुमार ने कहा कि भारत को केवल अधिक वकीलों की नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस से भरे वकीलों की जरूरत है. उन्होंने विद्यार्थियों से किसानों, मजदूरों, महिलाओं और आम परिवारों की समस्याओं को समझने और उनके लिए काम करने का आग्रह किया.
उन्होंने घोषणा की कि कर्नाटक सरकार कानून के स्नातकों को न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने और युवा वकीलों को निरंतर शिक्षा देने के लिए एक समर्पित संस्थान स्थापित करेगी. इसके अलावा, एनएलएसआईयू में स्टार्टअप लॉ क्लिनिक की स्थापना में भी सरकार सहयोग करेगी. यहां विद्यार्थी, शिक्षक और वकील युवा उद्यमियों को निशुल्क कानूनी सलाह देंगे.
अदालतों में लंबित मामलों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमों के लंबित होने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मुकदमों में देरी के कारण लोगों और परिवारों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ता है.
उन्होंने कहा, “हमारे लिए जो सिर्फ एक मुकदमे का नंबर हो सकता है, वह किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी हो सकती है. न्याय को तेज, सरल, किफायती और सभी के लिए सुलभ बनाना जरूरी है.”
उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए. नागरिकों को मिलने वाला सम्मान, स्वतंत्रता, समानता और सुरक्षा भी देश की प्रगति के महत्वपूर्ण पैमाने हैं.
अपने संबोधन में शिवकुमार ने बताया कि वह कभी वकील बनना चाहते थे, लेकिन छात्र जीवन में पार्टी का टिकट मिलने के बाद राजनीति में आ गए. उन्होंने कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर और संविधान निर्माताओं के बताए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं.
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