रांची : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिवहन विभाग में बिना वैध अनुबंध के करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड प्रिंटिंग का काम करने वाली गुड़गांव की रोजमार्टा कंपनी का सरकार के साथ अनुबंध 22 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गया था. बाद में इसे केवल 22 मार्च, 2026 तक ही बढ़ाया गया था.
मरांडी ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पिछले लगभग तीन महीनों से यह कंपनी बिना किसी अधिकृत विस्तार के काम कर रही है और परिवहन विभाग द्वारा उसे करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि बिना वैध अनुबंध के भुगतान किस नियम के तहत किया जा रहा है, इसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी और क्या इसकी कैबिनेट से स्वीकृति ली गई थी?
नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले की तुलना पूर्व के ट्रेजरी स्कैम और फर्जी बैंक गारंटी घोटाले से करते हुए कहा कि राज्य में हर विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या किसी आम ठेकेदार को बिना अनुबंध के एक दिन भी काम करने दिया जाता है, तो रोजमार्टा कंपनी को यह विशेष संरक्षण किसके इशारे पर मिल रहा है?
मरांडी ने सरकार से इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी कि कहीं ऐसा न हो कि इस मामले में भी पिछले घोटालों की तरह छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराकर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जाए.
क्या है रोजमार्टा कंपनी
रोजमार्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड भारत की एक निजी कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2006 में हुई. इसका मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में है. कंपनी परिवहन, ई-गवर्नेंस और सड़क सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती है. इसके प्रमुख कार्यों में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) की प्रिंटिंग, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) का निर्माण, ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, वाहन परीक्षण केंद्र तथा इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं. कंपनी का दावा है कि वह HSRP क्षेत्र में भारत की अग्रणी कंपनियों में है और देश के कई राज्यों में परिवहन विभागों के साथ काम कर चुकी है. इसके अलावा यह वाहन ट्रैकिंग, स्मार्ट कार्ड निर्माण और अन्य डिजिटल परिवहन सेवाएं भी प्रदान करती है.
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