जोहार लाइव ब्यूरो
हजारीबाग की अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध मौत का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. मौत की परिस्थितियों, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और शरीर पर चोट के निशान को लेकर उठे सवालों के बीच कोर्ट ने जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर के बजाय DSP स्तर के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे. वहीं, अनुष्का को न्याय दिलाने और उनके आरोपी पति की गिरफ्तारी की मांग को लेकर रांची में कैंडल मार्च निकाला गया. परिवार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अनुष्का की मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने अदालत का ध्यान पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर भी दिलाया.
प्रार्थी पक्ष के मुताबिक, घटना के महज तीन घंटे के भीतर मृतका का दो बार पोस्टमार्टम कराया गया था. इस पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि मौत से जुड़ी परिस्थितियों का खुलासा हो सके.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि घटना के समय अनुष्का का पैर जमीन को छू रहा था और उनके शरीर पर चोट के निशान मौजूद थे. प्रार्थी पक्ष ने इन परिस्थितियों को संदिग्ध बताते हुए जांच में सभी पहलुओं की पड़ताल करने का आग्रह किया.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने DSP स्तर के अधिकारी से जांच कराने की बात कही. अब वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, मौत की वास्तविक परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
आरोपी पति की गिरफ्तारी की मांग, रांची में कैंडल मार्च
अनुष्का चक्रवर्ती को न्याय दिलाने और उनके आरोपी पति की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बीते सोमवार को रांची में कैंडल मार्च निकाला गया. मार्च जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा.
इसमें अनुष्का के परिजनों के साथ झारखंड मानवाधिकार संघ के प्रतिनिधि और सदस्य शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने आरोपी पति की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और मामले में त्वरित कार्रवाई की अपील की.
परिजनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामले में जल्द कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अनुष्का को न्याय मिल सके.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से DSP स्तर के अधिकारी से जांच कराने की जानकारी दिए जाने के बाद मामले में जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर जाएगी. अब जांच में पोस्टमार्टम से जुड़े सवालों, शरीर पर चोट के निशान और घटना की परिस्थितियों की पड़ताल अहम होगी.
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