किसलय शानू: रांची
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक केस में पटना जाकर प्रश्नपत्र रटकर परीक्षा देने के बाद अफसर बने छात्रों को 370 प्रश्नों के उत्तर सिर्फ तीन घंटे में रटवा दिये गये थे. छात्रों को प्रश्नों का उत्तर रटवाने के बाद प्रश्न पत्रों को जलाकर नष्ट कर दिया गया था. इस बात का खुलासा एसआइटी की जांच में हुआ है.
मामले में एक आरोपी संजय कुमार की भूमिका पर एसआइटी ने आरंभिक जांच पूरी कर ली है. जांच के दौरान एसआइटी को मिले तथ्यों के अनुसार आरापी ने उम्मीदवारों और अन्य बिचौलियों से संपर्क किया और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर पहले से उपलब्ध कराकर उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करने की व्यवस्था में हिस्सा लिया.

आरोपी के बयान के अनुसार, वह एक लाइब्रेरी में जान-पहचान वाले व्यक्ति के जरिए अजय कुमार के संपर्क में आया. इसके बाद उसने परीक्षा के लिए उम्मीदवार जुटाने के वास्ते अपने दोस्तों, छात्रों और अन्य लोगों से संपर्क किया.
जांच में कई उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जिनमें अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तम कुमार, त्रिभुवन यादव, राम कृष्ण कुमार सिंह, अमित कुमार और अन्य शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर इस व्यवस्था में लाया गया था.
जानकारी के अनुसार सीजीएल परीक्षा में कुल पेपर थे. इसमें पहले पेपर में 120, दूसरे में 100 और तीसरे पेपर में 150 प्रश्न थे. प्रत्येक प्रश्न सही उत्तर देने के लिए तीन नंबर निर्धारित थे, जबकि गलत उत्तर पर एक नंबर काट दिया जाता था.
पटना में डिफेंस एकेडमी के संचालक के साथ मिलकर रची गयी थी साजिश
एसआइटी को जांच में पता चला है कि संजय कुमार ने पटना के भीखना पहाड़ी स्थित ‘कृष्णा डिफेंस एकेडमी’ के संचालक राकेश रंजन के साथ मिलकर यह पूरी सेटिंग (धांधली) की थी. आरापी ने उम्मीदवारों से वादा किया गया था कि उन्हें परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिसके बदले में उन्हें मोटी रकम देनी होगी.
केस डायरी से पता चलता है कि आरोपी ने उम्मीदवारों को इस व्यवस्था के बारे में बताया और उन्हें पटना लाने में मदद की. आरोपी के बयान के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को उम्मीदवारों को पटना लाया गया और उन्हें गांधी मैदान तथा बुद्ध स्मृति पार्क के पास इकट्ठा किया गया.
यहां से उम्मीदवारों को एक घर में ले जाया गया, जहां कुछ अन्य लोग प्रश्न-पत्रों और उनके उत्तरों के तीन सेट लेकर आए. उम्मीदवारों को लगभग तीन घंटे तक वह सामग्री याद करने के लिए कहा गया, जिसके बाद प्रश्न-पत्रों को नष्ट कर दिया गया और उम्मीदवारों को अलग-अलग समूहों में वहां से भेज दिया गया.
इस पूरी व्यवस्था के तहत, आरोपियों ने उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र और चेक इकट्ठा करने में भूमिका निभाई.
जांच से पता चलता है कि ये दस्तावेज़, भुगतान और चयन के वादे के बदले में ‘सुरक्षा’ (गारंटी) के तौर पर रखे गए थे. इस तथ्य को इस बात के संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित तरीके से (organized manner) अंजाम दिया गया था.
केस डायरी में बाद में उम्मीदवारों से पैसे की मांग करने और राकेश रंजन तथा अन्य बिचौलियों को भुगतान करने की व्यवस्था का जिक्र है. केस डायरी में इस बात का भी उल्लेख है कि दिसंबर 2024 में अमित कुमार ने आरोपी के बैंक खाते में लगभग 3 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे, और इसके बाद नकद भुगतान भी किया गया.
आरोपी, अजय कुमार के साथ पटना गए थे और उन्होंने राकेश रंजन को पैसे सौंपे थे. आरोपी ने उम्मीदवारों के चयन के बाद और भी रकम का इंतजाम किया गया और उसे बिचौलियों के जरिए पहुंचाया गया.
जिन उम्मीदवारों के लिए आरोपी ने पेपर लीक किया था, अंततः उनका चयन हो गया.
जांच में उम्मीदवारों के मोबाइल फोन के लेन-देन और हस्तांतरण का भी जिक्र है. आरोपियों के कथित बयानों से पता चलता है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ इस बारे में चर्चा की थी कि परिणाम घोषित होने तक भुगतान को टाल दिया जाए, और उम्मीदवारों के चयन के बाद और पैसों की मांग की जाए.
इस वजह से बाद में बैंक खातों और नकद भुगतान के जरिए पैसों की व्यवस्था की गई और उन्हें ट्रांसफर किया गया. जांच से यह भी पता चलता है कि यह कथित रैकेट कई केंद्रों और बिचौलियों के जरिए चलाया जा रहा था, जिनमें बोकारो में दुग्धा, आसनसोल में नियामतपुर, दुर्गापुर में सितुलपुर, नेपाल में बीरगंज और पटना शामिल हैं.


