जोहार लाइव ब्यूरो
रांची: पलामू के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे ट्रैक पार करने की समस्या को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है. कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया है कि यदि सीमित ऊंचाई वाले अंडरपास (LHS) का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है, तो उसे अगले चार महीने के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए. साथ ही, अंडरपास में बरसात के दौरान पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रेलवे ट्रैक पार करने के लिए जोखिम नहीं उठाना पड़े.
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए. याचिका में रेलवे ट्रैक पर मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग या रोड ओवरब्रिज (ROB) बनाने की मांग की गई थी.

अंडरपास में पानी भरने से बढ़ती है परेशानी
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बाबन प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि संबंधित इलाके में बरसात के दौरान अंडरपास में पानी भर जाता है. इससे ग्रामीणों और खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है. ऐसी स्थिति में लोगों के पास रेलवे ट्रैक को सीधे पार करने या जलजमाव वाले अंडरपास से गुजरने के अलावा कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचता.
उन्होंने दलील दी कि इस समस्या का स्थायी समाधान रोड ओवरब्रिज का निर्माण है. हालांकि, रेलवे की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि संबंधित स्थान पर आरओबी बनाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थिति नहीं है.
रेलवे ने बताया, शुरू हो चुका है अंडरपास का निर्माण
रेलवे ने कोर्ट को बताया कि लालगढ़ बिहार और पांजरिकला के बीच रेलवे किलोमीटर 307/31 से 308/01 के स्थान पर लिमिटेड हाइट सबवे का निर्माण किया जा रहा है. इसका उद्देश्य ग्रामीणों को रेलवे ट्रैक पार करने के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है. रेलवे के अनुसार, राज्य सरकार से आरओबी निर्माण के लिए लागत में हिस्सेदारी की सहमति भी नहीं मिली है.
रेलवे ने यह भी बताया कि उसकी नीति के तहत नए मानवयुक्त लेवल क्रॉसिंग खोलने के बजाय दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अंडरपास और ओवरब्रिज जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जाती है.
जनहित के पैसे का उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे विशेषज्ञों की नीतियों और तकनीकी राय के मामले में अदालत सीधे यह तय नहीं कर सकती कि आरओबी बेहतर विकल्प है या अंडरपास. इसलिए याचिका में मांगा गया आरओबी निर्माण का आदेश नहीं दिया गया.
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि रेलवे अंडरपास को समस्या का समाधान मानकर उसका निर्माण कर रहा है, तो उसमें जलजमाव रोकने के लिए जरूरी इंतजाम करना भी उसकी जिम्मेदारी है. अन्यथा, सार्वजनिक धन खर्च करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा.
अदालत ने रेलवे अधिकारियों को निर्माण पूरा होने के बाद अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट 12 मार्च 2027 तक जमा करनी होगी. मामले को अनुपालन की समीक्षा के लिए 18 मार्च 2027 को फिर से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है.
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