जोहार लाइव ब्यूरो
रांची: नाबालिग से छेड़छाड़ और मोबाइल व सोने का लॉकेट छीनने के आरोप में रांची के मांडर निवासी मकबूल अंसारी को अदालत ने बरी कर दिया है. पीड़िता और घटना के समय उसके साथ मौजूद दोस्त ने अदालत में आरोपी की पहचान नहीं की और अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन भी नहीं किया. इसके बाद अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके.
अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त-IV सह पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश बिरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया. आरोपी न्यायिक हिरासत में था. अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो.

बेड़ो कॉलेज के पीछे जंगल में हुई थी घटना
अभियोजन के अनुसार, 27 मई 2026 को 16 वर्षीय पीड़िता अपने दोस्त के साथ बेड़ो कॉलेज के पीछे लफदाफादा जंगल की ओर गई थी. आरोप था कि वहां एक अज्ञात व्यक्ति ने उसके दोस्त के हाथ गमछे से बांध दिए और उसका मोबाइल छीन लिया. इसके बाद आरोपी पीड़िता को जंगल में कुछ दूर ले गया और उसके साथ छेड़छाड़ व मारपीट की. उस पर पीड़िता का मोबाइल और मां दुर्गा की प्रतिमा लगा सोने का लॉकेट छीनने का भी आरोप था.
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. जांच के बाद पुलिस ने मकबूल अंसारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया.
पीड़िता ने कहा, आरोपी वह व्यक्ति नहीं
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके दोस्त और उसके पिता की गवाही दर्ज कराई. हालांकि, तीनों गवाहों ने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया.
पीड़िता ने अदालत में कहा कि जंगल में घूमने के दौरान उसका मोबाइल और सोने का लॉकेट खो गया था. उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किए गए आरोपी की पहचान नहीं की. उसने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति की पहचान उसने पहचान परेड में की थी, वह अदालत में पेश किया गया व्यक्ति नहीं है.
पीड़िता के दोस्त ने भी आरोपी को पहचानने से इनकार कर दिया और घटना में मोबाइल छीनने की बात का समर्थन नहीं किया. पीड़िता के पिता ने बताया कि बेटी ने उन्हें मोबाइल खोने की जानकारी दी थी. उन्होंने भी आरोपी की पहचान नहीं की.
संदेह का लाभ देकर किया बरी
अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा. इसी आधार पर मकबूल अंसारी को आरोपों से बरी कर दिया गया और उसकी रिहाई का आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया.


