Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»कलाम जयंती विशेष : जब झारखंड के आदिवासी गांव में बच्चों से मिलने रुक गए थे राष्ट्रपति कलाम
    जोहार ब्रेकिंग

    कलाम जयंती विशेष : जब झारखंड के आदिवासी गांव में बच्चों से मिलने रुक गए थे राष्ट्रपति कलाम

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 15, 2026No Comments5 Mins Read3
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती 15 अक्टूबर को मनाई जाती है. 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे कलाम को देश ‘मिसाइल मैन’ और ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’ के नाम से याद करता है. विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलाम की पहचान एक ऐसे राष्ट्रपति के रूप में भी रही, जिनकी दिलचस्पी बच्चों और युवाओं से संवाद करने में थी.

    झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से भी उनकी यादें जुड़ी हैं. वे 2001 में चंदनकियारी, 2002 में झरिया, फरवरी 2004 में राष्ट्रपति के रूप में रांची, जमशेदपुर और मरांगहातु तथा अगस्त 2007 में जमशेदपुर आए थे. राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद 24 फरवरी 2011 को वे बीआईटी मेसरा के दीक्षांत समारोह में भी शामिल हुए थे.

    जब राष्ट्रपति ने बच्चों को देखकर रुकवा दी अपनी गाड़ी

    फरवरी 2004 में मरांगहातु गांव पहुंचे डॉ. कलाम ने बच्चों को देखकर अपनी गाड़ी रुकवाई और उनसे बातचीत की. द टेलीग्राफ की 13 फरवरी 2004 की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के प्राथमिक विद्यालय में उस समय 187 विद्यार्थी और तीन शिक्षक थे. विद्यालय के प्रधानाध्यापक गोपबंधु महतो ने उनसे ऑटोग्राफ मांगा, जिसे उन्होंने दिया.

    गांव में रेशम उत्पादन की गतिविधियों ने भी उनका ध्यान खींचा था. स्कूल की स्थिति जानने के बाद उन्होंने इसे माध्यमिक स्तर तक विकसित करने और कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया. तत्कालीन जिला प्रशासन की ओर से विद्यालय के उन्नयन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर पहल की बात सामने आई थी.

    कब-कब झारखंड आए थे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम?

    7-8 अक्टूबर 2001: बोकारो और चंदनकियारी

    डॉ. कलाम के झारखंड दौरे का एक शुरुआती चर्चित प्रसंग अक्टूबर 2001 का है. उस समय वे देश के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल थे. द टेलीग्राफ की 29 जुलाई 2015 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 8 अक्टूबर 2001 को वे चंदनकियारी पहुंचे थे. यहां उन्होंने औषधीय पौधों की खेती और ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों में रुचि दिखाई तथा विद्यार्थियों से बातचीत की.

    जनवरी 2002: झरिया की भूमिगत आग देखने पहुंचे

    राष्ट्रपति बनने से पहले डॉ. कलाम धनबाद के झरिया पहुंचे थे. उस समय वे तत्कालीन प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में जाने जाते थे. झरिया की भूमिगत आग से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए उन्होंने इस समस्या को वैज्ञानिक तरीके से समझने और नियंत्रित करने की संभावनाओं पर बात की थी.

    12-14 फरवरी 2004: राष्ट्रपति के रूप में रांची, जमशेदपुर और मरांगहातु

    राष्ट्रपति बनने के बाद डॉ. कलाम का झारखंड का एक महत्वपूर्ण दौरा 12 से 14 फरवरी 2004 के बीच हुआ. 13 फरवरी को वे जमशेदपुर में औद्योगिक कार्यक्रमों में शामिल हुए. उन्होंने राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला का दौरा किया और रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया. इसी दौरान उन्होंने झारखंड विधानसभा के सदस्यों के सामने राज्य के विकास पर भी अपने विचार रखे.

    इस दौरे के दौरान वे सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड स्थित आदिवासी बहुल मरांगहातु गांव पहुंचे. गांव के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से मुलाकात का यह प्रसंग उनकी सादगी और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की याद दिलाता है.

    21 अगस्त 2007: जमशेदपुर में टाटा स्टील के कार्यक्रम में शामिल हुए

    अगस्त 2007 में डॉ. कलाम के जमशेदपुर आने का उल्लेख भी समाचार रिपोर्टों में मिलता है. इस दौरे को टाटा स्टील के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है.

    24 फरवरी 2011: बीआईटी मेसरा, रांची

    राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी डॉ. कलाम का झारखंड आना जारी रहा. 24 फरवरी 2011 को वे रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा के 21वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. संस्थान के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसका उल्लेख है.

    झारखंड के विकास पर भी रखी थी अपनी बात

    डॉ. कलाम का झारखंड दौरा केवल गांव और बच्चों तक सीमित नहीं था. फरवरी 2004 में रांची में उन्होंने झारखंड विधानसभा के सदस्यों को संबोधित किया था. अपने संबोधन में उन्होंने राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और तकनीक की भूमिका पर विचार रखे थे.

    रांची के राजभवन में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान उन्होंने सीखने, रचनात्मकता और जिज्ञासा के महत्व पर जोर दिया. उनका मानना था कि युवाओं को सवाल पूछने, नए विचार विकसित करने और ज्ञान के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए.

    जयंती पर मरांगहातु का यह प्रसंग महत्वपूर्ण क्यों?

    डॉ. कलाम की जयंती पर अक्सर उनके प्रेरक विचारों, वैज्ञानिक उपलब्धियों और राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल की चर्चा होती है. लेकिन मरांगहातु की यह घटना उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाती है. देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाला व्यक्ति जब रास्ते में बच्चों को देखकर रुकता है, उनसे बातचीत करता है और उनके स्कूल की जरूरतों पर ध्यान देता है, तो शिक्षा के प्रति उसकी प्राथमिकता स्पष्ट होती है.

    कलाम 27 जुलाई 2015 को इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन बच्चों को सपने देखने, सीखने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के विकास में करने की उनकी प्रेरणा आज भी प्रासंगिक है.

    Also Read : फिर क्यों उठा अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला, कौन हैं दुष्यंत कुमार गौतम जिनकी राज्यपाल नियुक्ति का हो रहा विरोध

    A.P.J Abdul Kalam एपीजे अब्दूल कलाम पूर्व राष्ट्रपति
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous ArticleSIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर विचार करे : अभय ओक
    Next Article ओडिशा : NIT राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलके से बनाया फ्लोराइड हटाने वाला पदार्थ, लैब में 90 प्रतिशत तक सफल

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    धर्म परिवर्तन के बाद पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर नहीं मिलेगा पिछड़ा वर्ग आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    ओडिशा : NIT राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलके से बनाया फ्लोराइड हटाने वाला पदार्थ, लैब में 90 प्रतिशत तक सफल

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    SIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर विचार करे : अभय ओक

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    इमरान खान को मुंबई पुलिस का नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    फिर क्यों उठा अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला, कौन हैं दुष्यंत कुमार गौतम जिनकी राज्यपाल नियुक्ति का हो रहा विरोध

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जोहार शक्ति श्रृंखला भाग 5: मर्दों ने कहा नहीं बनायेंगे शौचालय, खुद बनी रानी मिस्त्री और पूरे गांव में बना दिया

    October 15, 2026
    Latest Posts

    धर्म परिवर्तन के बाद पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर नहीं मिलेगा पिछड़ा वर्ग आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

    October 15, 2026

    ओडिशा : NIT राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलके से बनाया फ्लोराइड हटाने वाला पदार्थ, लैब में 90 प्रतिशत तक सफल

    October 15, 2026

    कलाम जयंती विशेष : जब झारखंड के आदिवासी गांव में बच्चों से मिलने रुक गए थे राष्ट्रपति कलाम

    October 15, 2026

    SIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर विचार करे : अभय ओक

    October 15, 2026

    इमरान खान को मुंबई पुलिस का नोटिस, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

    October 15, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.