राउरकेला: ओडिशा स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के बेकार छिलकों से पानी में मौजूद फ्लोराइड हटाने वाला एक पदार्थ विकसित किया है. प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान इस पदार्थ ने दूषित पानी से 90 प्रतिशत तक फ्लोराइड हटाने में सफलता हासिल की. यह शोध कृषि अपशिष्ट के उपयोग से पेयजल शोधन की कम लागत वाली तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस शोध को प्रो. सुस्मिता मिश्रा और डॉ. प्रतिमा मिंज ने किया है. शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलकों से सक्रिय कार्बन तैयार कर उसे जिरकोनियम से संशोधित किया. इस प्रक्रिया से तैयार सामग्री पानी में मौजूद फ्लोराइड आयनों को सोखने में सक्षम हुई. प्रयोगशाला परीक्षणों में फ्लोराइड हटाने की प्रक्रिया में लगभग 10 से 20 मिनट का समय लगा. हालांकि, इसकी प्रभावशीलता परीक्षण की परिस्थितियों पर निर्भर करती है.
कृषि अपशिष्ट से तैयार हुई जल शोधन सामग्री
कटहल के छिलके आमतौर पर कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने इसी अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने का प्रयास किया है. इससे एक ओर कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग की संभावना बनती है, वहीं दूसरी ओर फ्लोराइड से दूषित पानी के उपचार के लिए वैकल्पिक सामग्री विकसित करने का रास्ता खुलता है.
भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा कई क्षेत्रों में पेयजल की गंभीर समस्या है. लंबे समय तक अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने से दांतों और हड्डियों से संबंधित फ्लोरोसिस हो सकता है. ऐसे में फ्लोराइड हटाने वाली प्रभावी और किफायती तकनीकें महत्वपूर्ण हैं.
अभी घरेलू इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं तकनीक
शोधकर्ताओं की इस तकनीक को पेटेंट आवेदन से संबंधित रिपोर्टों में भी जगह मिली है. आवेदन संख्या 202531080242 बताई गई है, जिसे 25 अगस्त 2025 को दाखिल किया गया था. हालांकि, पेटेंट आवेदन और पेटेंट का औपचारिक रूप से मंजूर होना अलग-अलग स्थितियां हैं.
फिलहाल यह तकनीक प्रयोगशाला स्तर पर सत्यापित है. घरों या सामुदायिक जलापूर्ति व्यवस्था में इसके इस्तेमाल से पहले वास्तविक भूजल के नमूनों पर परीक्षण, लंबे समय तक इसकी प्रभावशीलता, लागत और इस्तेमाल के बाद सामग्री के सुरक्षित निपटान जैसे पहलुओं की जांच होना बाकी है.
शोध के परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन केवल फ्लोराइड हटाने का प्रतिशत यह साबित नहीं करता कि उपचार के बाद पानी पीने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है. इसके लिए पानी की अंतिम गुणवत्ता की जांच भी आवश्यक होगी.
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