राँची : पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की. ब्रजमोहन राम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर पलामू लोकसभा सीट से 1996, 1998 और 1999 में लगातार तीन चुनाव जीते थे. इससे पहले वह अविभाजित बिहार की विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. उनका राजनीतिक सफर विधानसभा से शुरू होकर लोकसभा तक पहुंचा और अब उन्हें राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है.
ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को चंदवा में हुआ था. उस समय चंदवा बिहार के पलामू जिले का हिस्सा था. उन्होंने बीएस कॉलेज, लोहरदगा से पढ़ाई की. वह किसान परिवार से आते हैं.
वर्ष 1991 में वह बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए और 1995 तक विधायक रहे. उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था. नवंबर 2000 में झारखंड के गठन के बाद पलामू भी राज्य का हिस्सा बन गया.
साल 1996 से 1999 तक लगातार तीन बार बने सांसद
ब्रजमोहन राम ने 1996 में पहली बार पलामू लोकसभा सीट से चुनाव जीता. इसके बाद 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में भी वह जीतकर संसद पहुंचे. इस तरह उन्होंने लगातार तीन बार पलामू का प्रतिनिधित्व किया. सांसद रहते हुए वह संसद की विभिन्न समितियों से भी जुड़े रहे.
साल 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद वह दोबारा लोकसभा नहीं पहुंच सके. हालांकि, भाजपा में उनकी राजनीतिक सक्रियता जारी रही.
साल 2014 में पलामू लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर उनका नाम चर्चा में था. पार्टी ने अंततः पूर्व पुलिस अधिकारी वीडी राम को उम्मीदवार बनाया. उसी साल झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ब्रजमोहन राम को लातेहार सीट से उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार के दौरान 14 नवंबर 2014 को उनकी कार और एक डंपर के बीच टक्कर हुई थी. इस दुर्घटना में उनके बॉडीगार्ड और निजी सहायक की मौत हो गई थी.
भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी, अब ओडिशा के राज्यपाल
ब्रजमोहन राम भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा की झारखंड इकाई में प्रभारी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. वह अखिल भारतीय धोबी महासंघ की झारखंड इकाई के अध्यक्ष भी रहे हैं. लोकसभा चुनावों में लगातार तीन जीत के बाद भले ही वह संसद में दोबारा नहीं पहुंच सके, लेकिन संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही.
अब उन्हें ओडिशा के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे. उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य में कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी. इस नियुक्ति के साथ पलामू से जुड़े एक पूर्व सांसद को दूसरे राज्य के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी मिली है.
Also Read : झारखंडः टाटा हिताची को हाईकोर्ट से राहत, EPFO की कार्रवाई पर उठाए सवाल, जानिये पूरा मामला

