पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत में देशभर में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को सीधे स्कैम करार दे दिया है. उन्होंने कहा कि अगर पुनरीक्षण के नाम पर एक भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो यह चुनाव आयोग के लिए गंभीर विफलता और कलंक होगा और यह बात सिर्फ कहने भर की नहीं है, झारखंड के गोड्डा और लातेहार में बीते दिनों जो हुआ, वो कुरैशी की इसी बात को सच साबित करता दिख रहा है, जहां मुस्लिम वोटरों के नाम काटने की साजिश सामने आई है.
कुरैशी का आरोप – जानबूझकर, बुरी नीयत से हुआ काम
कुरैशी ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में मतदाताओं की संख्या करीब 15.7 फीसदी तक कम हो गई है, और इस गिरावट को उन्होंने बेहद गंभीर बताते हुए इसे स्कैम करार दिया. उनके मुताबिक देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, और इनमें से करीब 90 फीसदी लोग वोट देने के पूरी तरह हकदार हैं. कुरैशी सवाल उठाते हैं कि क्या ये सारे लोग कहीं और चले गए हैं, और अगर चले भी गए हैं तो नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया उतनी ही अहमियत क्यों नहीं पा रही. उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया जानबूझकर, बुरी नीयत से और चालबाजी के साथ की गई है, यानी यह कोई साधारण गलती नहीं बल्कि सोच-समझकर रची गई चाल है.
कुरैशी ने इस पूरी प्रक्रिया को असांविधानिक और गैरकानूनी बताया और कहा कि वोट देने का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, इसे किसी नौकरशाही या प्रक्रियागत बहाने से नहीं छीना जा सकता. 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट को आधार बनाने पर भी उन्होंने तंज कसा और कहा कि यह लिस्ट कोई पवित्र किताब नहीं है, उस लिस्ट में खुद उनके पिता का नाम गलत दर्ज था, तो इसे सिर्फ एक संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, अंतिम सच्चाई नहीं माना जा सकता. यह भी उन्होंने कहा कि अदालत ने भी इस मामले में बहुत नरम रुख अपनाया, जिसकी वजह से यह पूरी प्रक्रिया बेरोकटोक चलती रही.
गोड्डा में 200 फॉर्म-7, एक गिरफ्तारी
कुरैशी जिस पैटर्न की बात कर रहे हैं, वो झारखंड में भी बीते दिनों देखा गया. गोड्डा जिले में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंटों ने एसआईआर के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ थोक में फॉर्म-7 जमा किए, ताकि उनके नाम मतदाता सूची से कट जाएं. गोड्डा मुफस्सिल थाने में बीजेपी एजेंट विनय कुमार मंडल को 3 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, हालांकि कुछ घंटों बाद ही उन्हें जमानत मिल गई. मुकर्रम अंसारी नाम के एक वोटर की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई, जिनका आरोप है कि मंडल ने एक ही बूथ पर करीब 200 फॉर्म-7 जमा किए, और सभी मुस्लिम वोटरों के खिलाफ थे.
माहेश्तिकरी बूथ पर हाल यह था कि जिन 25 वोटरों के नाम काटने की मांग की गई, उनमें से 8 वोटर पीढ़ियों से गांव में रह रहे थे और अगस्त में प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में उनका नाम पहले से दर्ज था. झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रवि कुमार के मुताबिक ड्राफ्ट लिस्ट से साढ़े तेरह लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं, जिनमें 7 लाख से ज्यादा मृत मतदाता, 14 लाख से ज्यादा अनट्रेसेबल और 15 लाख से ज्यादा वे लोग हैं जो राज्य से बाहर शिफ्ट हो गए बताए गए. इस पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे ‘पॉलिटिक्स ऑफ एक्सक्लूजन’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की.
लातेहार में भी वही खेल, 42 नाम
गोड्डा का यह मामला सामने आने के बाद वही पैटर्न लातेहार जिले में भी दोहराया गया. मामला लातेहार के महुआडांड़ अनुमंडल का है, मनिका विधानसभा क्षेत्र की गड़बूढ़नी पंचायत के पहाड़कापू गांव का. यहां बूथ नंबर 317 पर 5 सितंबर को गांव की बीएलओ अनिमा खलखो के पास एक साथ 42 फॉर्म-7 जमा हुए. गांव वालों का आरोप है कि यह फॉर्म बीजेपी बूथ एजेंट जोगेंदर खरवार लेकर आए, जिन्हें ये फॉर्म पार्टी के राजेंद्र कुमार सोनी ने सौंपे थे. फॉर्मों में वोटरों को पते पर मौजूद नहीं या शिफ्टेड बताकर नाम काटने की मांग की गई, जबकि गांव वालों का कहना है कि इनमें कई वोटर, जैसे अख्तरी खातून, आज भी उसी गांव में रहती हैं और उनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में पहले से दर्ज है.
गांव में बैठक, प्रशासन को आवेदन देने की तैयारी
मामला सामने आने के बाद पहाड़कापू अंजुमन कमिटी ने गांव में बैठक बुलाई, जिसमें पंचायत की मुखिया रेणु तिग्गा भी शामिल हुई. बैठक में तय हुआ कि दोषी बूथ एजेंटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए महुआडांड़ के अनुमंडल पदाधिकारी सुलेमान मुंडरी को आवेदन दिया जाएगा. हालांकि अब तक इस मामले में बीजेपी या जिला प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
गोड्डा से लातेहार तक जो पैटर्न दिख रहा है, वो ठीक वही सवाल खड़ा करता है जो कुरैशी भुवनेश्वर में उठा रहे थे. नाम सिर्फ काटे क्यों जा रहे हैं, जोड़े क्यों नहीं जा रहे, और अगर एक भी योग्य वोटर का नाम कटा है, तो इसकी जवाबदेही आखिर चुनाव आयोग की नहीं तो किसकी है.
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