गोवा सरकार ने जबरन या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है. गोवा कैबिनेट ने ‘गोवा अवैध धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दे दी है. यह विधेयक 31 अगस्त से शुरू होने वाले गोवा विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र में पेश किया जाएगा.
प्रस्तावित कानून में बल, दबाव, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी या शादी के जरिए कराए जाने वाले कथित अवैध धर्म परिवर्तन के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं. विधेयक के तहत दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माना और पीड़ित को पांच लाख रुपये तक मुआवजा देने का भी प्रावधान है.
शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर भी रोक
प्रस्तावित कानून में शादी के जरिए धर्म परिवर्तन को लेकर भी सख्त प्रावधान किया गया है. अगर यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने सिर्फ धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से शादी की है, तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है.
विधेयक में धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक व्यक्तियों को भी कानून के दायरे में रखा गया है. इसमें हिंदू पुजारी और मुस्लिम मौलवी समेत ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं, जो अवैध धर्म परिवर्तन कराने में भूमिका निभाते हैं. ऐसे मामलों में न्यूनतम 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान बताया गया है.
नाबालिग, महिला या SC-ST के धर्म परिवर्तन पर और कड़ी सजा
अगर अवैध धर्म परिवर्तन का शिकार नाबालिग, दिव्यांग व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति का सदस्य होता है, तो प्रस्तावित कानून में और कड़ी सजा का प्रावधान है. ऐसे मामलों में दोषी को 5 से 14 साल तक की कठोर कैद हो सकती है. इसके साथ कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
प्रस्तावित विधेयक का मकसद उन धर्मांतरणों पर कार्रवाई करना है, जो बल, दबाव, अनुचित प्रभाव, लालच, धोखाधड़ी या विवाह के माध्यम से कराए जाते हैं. सरकार का प्रस्ताव ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खोलता है. वहीं, धार्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों पर भी कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, अगर उनकी भूमिका अवैध धर्म परिवर्तन में पाई जाती है.
कांग्रेस ने जताया विरोध
विधेयक को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. गोवा कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि प्रस्तावित एंटी-कन्वर्जन कानून राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है. गोवा कांग्रेस अध्यक्ष कार्लोस अल्वारेज फेरेरा ने कहा है कि कांग्रेस विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने पर इसका विरोध करेगी. सरकार का समर्थन करने वाले एक निर्दलीय विधायक ने भी दावा किया कि इस तरह का कानून गोवा में सांप्रदायिक अशांति पैदा कर सकता है और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से विधेयक को विधानसभा में पेश करने पर पुनर्विचार करने की अपील की है.
कई राज्यों में पहले से लागू हैं एंटी-कन्वर्जन कानून
गोवा से पहले भी देश के कई राज्यों में अवैध या जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून बनाए जा चुके हैं. इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं. अब गोवा भी इसी तरह के कानून के दायरे में आने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हालांकि, विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान अंतिम रूप ले सकेंगे.
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