दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चले आंदोलन के दौरान की स्थिति को याद करते हुए सोनम वांगचुक ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत, सौरव और आशुतोष की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से लेकर आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल तक अपनी चिंताओं को खुलकर रखा.
सोनम वांगचुक ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीति में आगे बढ़ने की इच्छा होना अपने आप में गलत नहीं है. लेकिन जिस मंच को लोगों ने छात्र आंदोलन मानकर समर्थन दिया, उसे उसी दौरान राजनीतिक पार्टी में बदल देना ठीक नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के समय वह किसी के भविष्य की गारंटी नहीं दे सकते थे. उन्होंने कहा कि वह खून से लिखकर यह नहीं दे सकते कि भविष्य में कोई व्यक्ति भ्रष्ट नहीं होगा या राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम नहीं करेगा.
एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने आंदोलन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय कुछ लोगों के राजनीतिक जुड़ाव को लेकर चर्चाएं होने लगी थीं. लोगों के बीच यह भी चर्चा थी कि आंदोलन से जुड़े कुछ लोग पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं.
हालांकि, सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी व्यक्ति का पहले किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा होना अपने आप में गलत नहीं है. उनके मुताबिक, राजनीति से जुड़े होने या किसी पार्टी में काम करने को लेकर वह किसी व्यक्ति को गलत नहीं मानते और न ही किसी के अतीत को लेकर ज्यादा मुद्दा बनाते हैं.
राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं जरूर होंगी
अभिजीत, सौरव और आशुतोष की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी अपनी समझ और परख के आधार पर उन्हें लगता है कि आंदोलन से जुड़े लोगों में राजनीति में आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा जरूर हो सकती है. उन्होंने कहा कि इसमें कोई गलत बात नहीं है.
सोनम वांगचुक के मुताबिक, कोई व्यक्ति इतना संत होने का दावा नहीं कर सकता कि वह कहे कि उसके भीतर किसी तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा है ही नहीं. राजनीति में आगे बढ़ने की इच्छा होना स्वाभाविक है और इसे अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता.
आंदोलन के मंच की पवित्रता
सोनम वांगचुक की असली चिंता आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर थी. उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म किसी राजनीतिक पार्टी के तौर पर शुरू नहीं हुआ था. लोगों ने इसे छात्रों और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने वाला आंदोलन मानकर समर्थन दिया था. ऐसे में इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी था. उनका कहना था कि आंदोलन को न्यूट्रल और अराजनीतिक रखा जाए तो यह ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर सकता है और लोगों का भरोसा भी बना रहता है.
उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग भविष्य में किसी राजनीतिक पार्टी में जा सकते हैं या चाहें तो अपनी अलग राजनीतिक पार्टी भी बना सकते हैं. इसमें कोई रोक नहीं है. लेकिन जिस मंच को लोगों ने छात्र आंदोलन के रूप में समर्थन दिया, उसे उसी दौरान राजनीतिक रंग देना सही नहीं होगा.
लोगों ने नहीं देखा कि कौन किस पार्टी से
सोनम वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों ने उस समय यह नहीं देखा था कि कौन बीजेपी से है, कौन कांग्रेस से और कौन पहले आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहा है. लोगों ने आंदोलन को मुख्य रूप से छात्रों की आवाज और उनके मुद्दों से जुड़े आंदोलन के तौर पर देखा था. उनके मुताबिक अगर उस आंदोलन को किसी खास राजनीतिक पार्टी या एजेंडे से जोड़ दिया जाता तो लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता था.
कल को कुछ गलत हुआ तो लोग मुझे पकड़ेंगे
सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी चिंता जताई थी. उन्होंने बताया कि उस समय कई लोग उनसे कहते थे कि वे आंदोलन में उन्हें देखकर और उन पर भरोसा करके आए हैं. कुछ लोगों ने उनसे यह भी कहा था कि अगर भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों ने कुछ गलत किया तो लोग उनसे जवाब मांगेंगे.

इसी संदर्भ में सोनम वांगचुक ने कहा कि वह किसी व्यक्ति के भविष्य के चरित्र और इरादों की गारंटी नहीं दे सकते. उन्होंने कहा कि वह खून से लिखकर यह नहीं दे सकते कि भविष्य में कोई व्यक्ति भ्रष्ट नहीं होगा या राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम नहीं करेगा.


