उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है. रविवार को सोशल मीडिया पर अपने फैसले की जानकारी देते हुए उन्होंने अपने 13 साल के सफर को याद किया और लिखा, “पद खत्म हो सकता है, लेकिन सपने खत्म नहीं होते.”
दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने एक बार फिर उस सवाल को चर्चा में ला दिया है, जो अक्सर किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी के नौकरी छोड़ने पर उठता है, आखिर इतनी प्रतिष्ठित और ताकतवर नौकरी छोड़ने के बाद ये अफसर जाते कहां हैं?
क्या राजनीति अब नई मंजिल बन रही है? क्या कॉर्पोरेट और स्टार्टअप की दुनिया उन्हें ज्यादा आकर्षित कर रही है? या फिर वे सरकारी व्यवस्था से बाहर रहकर समाज और पब्लिक पॉलिसी में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं?
10 साल में 20 आईएएस अधिकारियों ने छोड़ी सेवा
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के रिकॉर्ड्स के आधार पर द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि 2015 से मई 2025 के बीच कुल 20 आईएएस अधिकारियों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया. इससे पहले 2010 से 2014 के बीच 11 आईएएस अधिकारियों ने सेवा छोड़ी थी.
यानी सिविल सेवा को बीच में छोड़ देना अब कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं रह गया है. पिछले कुछ वर्षों में युवा और वरिष्ठ दोनों स्तर के अधिकारी अलग-अलग कारणों से प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने का फैसला कर रहे हैं.
आईपीएस में भी बढ़ रहे हैं इस्तीफे और वीआरएस के मामले
आईपीएस अधिकारियों के इस्तीफों का कोई एक केंद्रीय सार्वजनिक डेटाबेस उपलब्ध नहीं है. हालांकि, ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी रिपोर्टों और मीडिया में सामने आए मामलों से पता चलता है कि कई आईपीएस अधिकारी भी नौकरी छोड़कर दूसरी राह चुन रहे हैं.
व्हिस्पर्स इन द कॉरिडोर्स के रिकॉर्ड और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में राज कनौजिया, कशिश मित्तल, विद्या भूषण, ब्रज किशोर रवि, काम्या मिश्रा, मोहम्मद सुलेमान, सुजाता आर. कार्तिकेय, जे.पी. सिंह और सिद्धार्थ कौशल समेत कई अधिकारियों के इस्तीफे या वीआरएस के मामले सामने आए हैं.
जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि बीते 14 महीनों में 7 आईपीएस अधिकारियों ने सेवा छोड़ने का फैसला किया.
लाल बत्ती छोड़ने के बाद आखिर जाते कहां हैं अफसर?
आईएएस और आईपीएस की नौकरी छोड़ने वाले अधिकारियों के सामने आमतौर पर तीन बड़े रास्ते दिखाई देते हैं.
- राजनीति की पिच पर एंट्री
सबसे ज्यादा चर्चा राजनीति में जाने वाले अधिकारियों की होती है. प्रशासन में लंबे समय तक काम करने के बाद कई अफसर सीधे चुनावी राजनीति में उतरते हैं.
छत्तीसगढ़ कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी ओ.पी. चौधरी ने 2018 में इस्तीफा दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. आज वह छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री हैं. वहीं, कुछ पूर्व आईपीएस अधिकारी भी वीआरएस या इस्तीफे के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़कर सक्रिय राजनीति में अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं.
- कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी की दुनियानौकरी छोड़ने वाले कई अधिकारियों के लिए निजी क्षेत्र दूसरा बड़ा विकल्प बनकर उभरा है. सरकार चलाने का अनुभव, नीति निर्माण की समझ और बड़े स्तर पर प्रशासन संभालने का अनुभव उन्हें कॉर्पोरेट कंपनियों, कंसल्टिंग फर्मों और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अहम भूमिका दिला सकता है. कुछ अधिकारी स्टार्टअप की दुनिया में भी अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश करते हैं.
- पब्लिक पॉलिसी और सामाजिक बदलावहर अधिकारी राजनीति या कॉर्पोरेट की तरफ नहीं जाता. कई लोग सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद भी पब्लिक सर्विस से पूरी तरह दूर नहीं होते. वे थिंक टैंक, सामाजिक संस्थाओं, एनजीओ, शिक्षण संस्थानों और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े संगठनों के साथ काम करते हैं. उनका मकसद सरकारी व्यवस्था के भीतर नहीं, बल्कि उसके बाहर रहकर नीति और समाज में बदलाव लाना होता है.
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