झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन 15वें दिन भी जारी है. इस बीच सरकार ने आंदोलन से जुड़े छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू कर दी है. शनिवार यानि की आज सरकार की कमेटी ने सबसे पहले नरेंद्र महतो गुट के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद NSUI के प्रतिनिधिमंडल ने कमेटी के सामने अपनी मांगें रखीं.
NSUI ने 14वीं JPSC परीक्षा को तत्काल रद्द करने की मांग की है. इसके साथ ही संदिग्ध परीक्षाओं की CID या SIT से 90 दिनों के अंदर जांच कराने और जांच के नतीजों को सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई है. छात्र प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार आंदोलन से जुड़े सभी हितधारकों से बातचीत कर उनकी भावनाओं और सुझावों को समझना चाहती है. उन्होंने कहा कि इसी क्रम में NSUI का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और सुझावों के साथ कमेटी से मिला.
सुदिव्य कुमार ने कहा,
हम लोगों ने भी उनके सुझावों का बड़ी गंभीरता से अध्ययन किया. इस प्रतिनिधिमंडल की मांगें बहुत जायज प्रतीत होती हैं. हम लोग भी ये समझते हैं कि मुख्यमंत्री के सामने जब ये मांगें रखी जाएंगी तो इस संबंध में मुख्यमंत्री का बहुत सकारात्मक जवाब आएगा.
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं 5 मांगें
NSUI ने अपने पूरा मांग पत्र सौंपा है, जिसे छात्रों से बात करके, उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि तत्काल प्रभाव से 14वीं JPSC को रद किया जाए. जितनी भी संदिग्ध परीक्षाएं हुई हैं, CID-SIT के माध्यम से 90 दिनों के अंदर जांच की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए.
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए। हमारी एक मांग ये भी है कि परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर हो. इसके अलावा एक सुझाव दिया गया है कि सरकार परीक्षा कराने की जिम्मेदारी एजेंसियों को देने की बजाय, खुद से पूरा प्रक्रिया को करे.
आउटसोर्सिंग खत्म करने की मांग
NSUI ने परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी बाहरी एजेंसियों को देने के बजाय सरकार की ओर से पूरी प्रक्रिया संचालित करने का सुझाव दिया है. कुमार राजा ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में आउटसोर्सिंग कई समस्याओं की जड़ है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपनी एक मजबूत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली तैयार करती है, तो इससे अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा और परीक्षाओं में गड़बड़ी की आशंका भी कम होगी. अब छात्र संगठनों के साथ बातचीत के बाद सरकार की ओर से लिए जाने वाले अगले फैसले पर सभी की नजर है. आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी अपनी मांगों पर सरकार के स्पष्ट निर्णय का इंतजार कर रहे हैं.
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