विजय उरांव, रांची
बीते दिनों मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा को लेकर जलसत्याग्रह से लेकर फांसी और चिता आंदोलन तक किया गया. प्रभावित परिवारों का आरोप था कि उन्हें मुआवजा राशि और पुनर्वास नहीं मिल रही थी. इसको लेकर लंबे समय तक भूख हड़ताल भी की गई. केन बेतवा प्रोजेक्ट में प्रभावित गांवों के परिवार इस साल डुब सकते हैं.
इसकी बात जब लोकसभा प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के पास पहुंची तो उन्होंने सरकार से इससे संबंधित सवाल किए, देखिए क्या कहा सरकार ने.
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में अहम जानकारी दी है. जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि परियोजना के पहले चरण से कुल 1,913 परियोजना प्रभावित परिवार (PAFs) प्रभावित होंगे, जिनमें 648 अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवार शामिल हैं. इन परिवारों की कुल प्रभावित आबादी 8,339 है.
राहुल गांधी और अजेन्द्र सिंह लोधी द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है. हालांकि, जनजातीय कार्य मंत्रालय परियोजना की स्टीयरिंग और मॉनिटरिंग समितियों का सदस्य है और परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास कार्यों की निगरानी करता है.
मुआवजे की राशि नहीं मिलने की कोई शिकायत नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय को ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, जिसमें यह आरोप लगाया गया हो कि रिकॉर्ड में मुआवजे का भुगतान दिखाया गया लेकिन लाभार्थियों तक राशि नहीं पहुंची. हालांकि, केन-बेतवा परियोजना से होने वाले विस्थापन को लेकर विभिन्न ज्ञापन और शिकायतें मिली हैं. चूंकि वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इन शिकायतों को मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित जिला प्रशासन को जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है.

ग्राम सभा बैठकों का रिकॉर्ड केंद्र के पास नहीं
सरकार ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत आयोजित ग्राम सभाओं की बैठकें, उनमें लोगों की भागीदारी, सहमति, हस्ताक्षर और मुआवजे या विस्थापन से जुड़े रिकॉर्ड केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं. यह जानकारी संबंधित राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ही संधारित करते हैं.
बेदखली से पहले वन अधिकार कानून का पालन जरूरी
सरकार ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केन-बेतवा परियोजना से जुड़े दो प्रस्तावों को 6 मई 2021 और 3 अक्टूबर 2023 को अंतिम (स्टेज-II) वन स्वीकृति दी थी. इन स्वीकृतियों में स्पष्ट शर्त रखी गई है कि परियोजना शुरू होने से पहले राज्य सरकार पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना लागू करेगी और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत सभी दावों का निपटारा सुनिश्चित करेगी.
सरकार ने यह भी दोहराया कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(5) के अनुसार किसी भी पात्र वनवासी या आदिवासी परिवार को उसके अधिकारों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले बेदखल नहीं किया जा सकता.
मुआवजा बढ़ाने का फैसला राज्यों के अधिकार क्षेत्र में
साझा संसाधनों को मुआवजे में शामिल करने, मुआवजे की राशि बढ़ाने और पुनर्वास की कट-ऑफ तिथि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार ने कहा कि इन विषयों पर निर्णय लेना संबंधित राज्य सरकार और परियोजना प्राधिकरण का अधिकार है.
सरकार के इस जवाब से स्पष्ट है कि परियोजना की निगरानी में केंद्र की भूमिका है, लेकिन मुआवजा, पुनर्वास और वन अधिकार अधिनियम के पालन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और परियोजना प्राधिकरण पर ही है.

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