विजय उराँव
झारखंड के चतरा लोकसभा क्षेत्र में व्यावसायिक कोयला खनन की रफ्तार अब भी कागजों तक सीमित है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि चतरा में नीलाम किए गए सभी 8 कमर्शियल कोल ब्लॉक अभी तक चालू नहीं हो सके हैं.
सरकार के अनुसार, ये सभी परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं और आवश्यक वैधानिक मंजूरियों, भूमि अधिग्रहण तथा आधारभूत ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया से गुजर रही हैं.
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में सांसद डॉ. भोला सिंह और काली चरण सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 30 जून 2026 तक देशभर में कमर्शियल माइनिंग के तहत 132 कोयला ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं.
इनमें से 23 ब्लॉकों को माइन ओपनिंग परमिशन (एमओपी) मिल चुकी है और 15 ब्लॉकों से उत्पादन शुरू हो गया है. वहीं 8 ब्लॉक खदानों के विकास कार्य में लगे हैं, जबकि 109 ब्लॉक अभी अपने निर्धारित विकास काल में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं.
चतरा के सभी 8 ब्लॉक विकास के चरण में
सरकार ने बताया कि झारखंड में कुल 37 कमर्शियल कोल ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, जिनमें चतरा लोकसभा क्षेत्र के 8 ब्लॉक शामिल हैं. इन ब्लॉकों में चकला, बृंदा, ससई, नॉर्थ धाडू (ईस्ट और वेस्ट), सेरेगढ़ा, वेस्ट ऑफ टुबेड और चितरपुर (रिवाइज्ड) शामिल हैं.

इनका आवंटन हिंडाल्को, डालमिया सीमेंट, एनटीपीसी माइनिंग, एनएलसी इंडिया, रुंगटा संस, ओरिएंटल क्वारिज एंड माइंस तथा ओडिशा अलॉय स्टील जैसी कंपनियों को किया गया है. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी आठों ब्लॉक फिलहाल नॉन-ऑपरेशनल हैं.

2025-26 में नहीं हुआ उत्पादन
सरकार के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश के कमर्शियल कोल माइंस से 26.12 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जबकि झारखंड में यह आंकड़ा 0.35 मिलियन टन रहा. लेकिन चतरा लोकसभा क्षेत्र में एक भी कमर्शियल कोल माइंस उत्पादन की स्थिति में नहीं होने के कारण यहां से एक टन भी कोयले का उत्पादन नहीं हुआ.
सरकार ने बताई देरी की वजह
सरकार ने कहा कि ब्लॉकों के संचालन में देरी का मुख्य कारण यह है कि परियोजनाएं अभी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति, खदान विकास और रेल-सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं. अलग-अलग नीलामी चरणों में आवंटित होने के कारण सभी ब्लॉकों की प्रगति भी अलग-अलग स्तर पर है.
सरकार ने यह भी बताया कि कमर्शियल कोल माइनिंग को गति देने के लिए कई सुधार किए गए हैं. इनमें अन्वेषण प्रक्रिया को सरल बनाना, निजी एजेंसियों को अधिक अधिकार देना, कोकिंग कोल को क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल घोषित करना और माइन ओपनिंग परमिशन की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है.

सरकार का दावा है कि इन सुधारों से आने वाले समय में परियोजनाओं के संचालन में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार व बुनियादी ढांचे का विकास होगा.
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