रांची: JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार को राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का पहला दौर संपन्न हो गया. बैठक में JPSC-JSSC Reform Manch और JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच (देवेंद्र गुट) के प्रतिनिधियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा.
वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, JPSC और JSSC में संस्थागत सुधार, TDPL एजेंसी से आयोजित परीक्षाओं एवं उससे जुड़ी नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर लागू करने सहित अपनी प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखीं. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए.
बैठक के बाद बाहर आए छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यह वार्ता का केवल पहला दौर था. बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है और आगे भी सरकार के साथ वार्ता जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना है, लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. अगले दौर की बैठक में बाकी मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी.
JPSC-JSSC Reform Manch की ओर से रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह ने बैठक में हिस्सा लिया. वहीं JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच (देवेंद्र गुट) की ओर से रामवतार महतो, दीनबंधु मंडल, चंदन कुमार, रविशंकर, प्रेम कुमार, अमित कुमार और विमल कुमार वार्ता में शामिल हुए.
सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया गया. हालांकि पहले दौर की वार्ता के बाद कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा नहीं की गई.
गौरतलब है कि JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र 25 जुलाई 2026 से आंदोलन कर रहे हैं. रांची से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्यव्यापी स्वरूप ले चुका है. पहले दौर की वार्ता समाप्त होने के बाद अब सभी की नजर अगली बैठक और सरकार के संभावित निर्णय पर टिकी है.




