रांची: झारखंड में बायोमास से ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इस क्षमता का बड़े स्तर पर इस्तेमाल अब तक नहीं हो पाया है. खेतों के अवशेष, पशुओं का गोबर, जैविक कचरा और अन्य संसाधनों से बिजली, बायोगैस और दूसरी ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का रास्ता मिल सकता है.
लोकसभा में 5 अगस्त को पूछे (Q.N. 2968) गए सवाल के जवाब में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने बताया कि झारखंड में बायो-एनर्जी क्लस्टर को समर्थन देने वाली कोई सरकारी योजना फिलहाल लागू नहीं है. यह सवाल गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने पूछा था.
2,813 मेगावाट बायोमास ऊर्जा क्षमता का अनुमान
iFOREST की रिपोर्ट “Jharkhand Renewable Energy Potential Re-Assessment: Focus on Solar, Wind and Biomass” के अनुसार, झारखंड में बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन की अनुमानित संभावित क्षमता करीब 2,813 मेगावाट है.
बायो-एनर्जी क्लस्टर मॉडल के तहत कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट, वन आधारित जैविक सामग्री और अन्य संसाधनों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था विकसित की जा सकती है. इससे छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ रोजगार और किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है.
अभी सीमित परियोजनाओं तक सिमटा बायोमास सेक्टर
केंद्रीय MNRE के अनुसार, झारखंड में बायोमास क्षेत्र में फिलहाल सीमित परियोजनाएं संचालित हैं. राज्य में 1.04 मेगावाट क्षमता का एक Waste-to-Energy प्रोजेक्ट, 19.1 मेगावाट क्षमता की पांच Non-bagasse Cogeneration परियोजनाएं स्थापित की गई हैं. यानी झारखंड में बायोमास ऊर्जा की संभावित क्षमता काफी अधिक है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर उपयोग करने के लिए जरूरी क्लस्टर आधारित ढांचा अभी विकसित नहीं हो पाया है.
लोकसभा जवाब के अनुसार, “Development of Solar Parks and Ultra Mega Solar Power Projects” योजना के तहत झारखंड में कुल 872 मेगावाट क्षमता के चार सोलर पार्कों को मंजूरी दी गई है.
गोड्डा क्षेत्र में 7,109 सोलर पंप लगाए गए, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से 729 रोजगार
पीएम-कुसुम योजना के तहत गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में 7,109 सोलर पंप लगाए गए हैं. वहीं, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 31 जुलाई तक गोड्डा जिले में 34, देवघर में 444, दुमका में 21 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं.
MNRE के अनुसार, गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में सोलर, बायोमास और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से करीब 729 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं.
इसके अलावा, मंत्रालय की कौशल विकास योजनाओं के तहत पूरे झारखंड में 7,324 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के 373 लोग शामिल हैं.
जब झारखंड में बायोमास ऊर्जा उत्पादन की अनुमानित क्षमता 2,813 मेगावाट है और राज्य में बायो-एनर्जी क्लस्टर के लिए फिलहाल कोई सरकारी योजना लागू नहीं है, तो सवाल उठता है कि राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए क्या तैयारी की है?
क्या बायो-एनर्जी क्लस्टर विकसित करने के लिए केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव भेजा गया है? और बायोमास आधारित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश व रोजगार बढ़ाने की ठोस योजना कब बनेगी?
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