त्रिपुरा की लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत की पहचान को बचाने में जुटे लोक कलाकार सूर्य कुमार देबबर्मा, जिन्हें लोग ‘सदागर’ के नाम से भी जानते हैं, इन दिनों देशभर में चर्चा में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में त्रिपुरा के पारंपरिक वाद्य यंत्र चोंगप्रेंग का जिक्र करते हुए सूर्य कुमार देबबर्मा के प्रयासों की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि देबबर्मा ने इस पारंपरिक कला को फिर से लोगों, खासकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.
क्या है चोंगप्रेंग, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है
चोंगप्रेंग त्रिपुरा की जनजातीय संस्कृति से जुड़ा तीन तारों वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र है. इसे बांस से तैयार किया जाता है और इसकी मधुर धुन त्रिपुरा की लोक परंपरा का अहम हिस्सा मानी जाती है. समय के साथ यह वाद्य यंत्र लोगों की यादों से दूर होता गया और नई पीढ़ी में इसकी पहचान भी कम होने लगी. ऐसे समय में सूर्य कुमार देबबर्मा ने इसके संरक्षण और लोकप्रिय बनाने का काम किया. उनकी कोशिशों ने चोंगप्रेंग को फिर से त्रिपुरा की सांस्कृतिक पहचान के केंद्र में ला दिया.
सूर्य कुमार देबबर्मा का योगदान सिर्फ चोंगप्रेंग तक सीमित नहीं है. उन्हें कोकबोरोक लोकगीतों, बाउल संगीत, बंगाली लोक संगीत और अन्य पारंपरिक संगीत विधाओं को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ में उनके इन प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया.
सचिन देव बर्मन सम्मान से भी नवाजे गए
लोक संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए त्रिपुरा सरकार ने जनवरी 2026 में उन्हें सचिन देव बर्मन मेमोरियल स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया. यह सम्मान त्रिपुरा के लोक कलाकार के रूप में उनकी लंबी सांस्कृतिक यात्रा और योगदान की पहचान है.
सूर्य कुमार देबबर्मा की कहानी सिर्फ एक कलाकार की कहानी नहीं है. यह उस कोशिश की कहानी है, जिसमें एक कलाकार अपनी मिटती हुई सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहा है. चोंगप्रेंग की धुन को गांवों और स्थानीय परंपराओं से निकालकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा सकता है. प्रधानमंत्री की सराहना के बाद अब त्रिपुरा के इस पारंपरिक वाद्य और उसके संरक्षण में जुटे कलाकारों को देशभर में नई पहचान मिलने की उम्मीद है.

