भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर सकता है. Reuters के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI साल 2026 के बाकी समय में Repo Rate को 5.25% पर ही बनाए रख सकता है.
Reuters ने 72 अर्थशास्त्रियों से इस बारे में राय ली. इनमें से 68 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया कि RBI ब्याज दर को मौजूदा स्तर पर ही रखेगा. वहीं, सिर्फ चार अर्थशास्त्रियों ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई.
आखिर RBI ब्याज दर क्यों नहीं बढ़ाना चाहता?
इसे आसान भाषा में समझें तो RBI के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं—महंगाई और आर्थिक विकास.
महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दर बढ़ाना एक तरीका है. लेकिन ब्याज दर बढ़ने से लोगों के लिए घर, गाड़ी या कारोबार के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है. इससे लोग कम कर्ज लेंगे और कंपनियां भी निवेश कम कर सकती हैं. इसका असर देश की आर्थिक रफ्तार पर पड़ सकता है.
दूसरी तरफ, अगर ब्याज दर कम की जाती है तो कर्ज सस्ता हो सकता है और बाजार में खर्च और निवेश बढ़ सकता है. लेकिन इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है. ऐसे में RBI फिलहाल न तो ब्याज दर बढ़ाने और न ही घटाने के बजाय मौजूदा दर पर ही स्थिति को देखने के पक्ष में नजर आ रहा है.
आम लोगों पर क्या असर होगा?
अगर RBI Repo Rate को 5.25% पर बनाए रखता है तो होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज लेने वाले लोगों पर तुरंत ब्याज बढ़ने का दबाव नहीं आएगा. हालांकि, अलग-अलग बैंक अपनी नीतियों के अनुसार लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं.
जिन लोगों ने पहले से लोन ले रखा है, उनके लिए भी फिलहाल ब्याज दर में अचानक बढ़ोतरी की आशंका कम होगी.
महंगाई और कच्चे तेल पर रहेगी नजर
RBI के लिए महंगाई अब भी एक बड़ी चिंता है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी.
अगर कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. इसका असर पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. वहीं, रुपये की कीमत कमजोर होने से विदेश से सामान खरीदना महंगा हो सकता है.
ऐसे में RBI आने वाले महीनों में महंगाई, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और आर्थिक विकास पर नजर रखेगा.
फिलहाल ब्याज दर में बदलाव की संभावना कम
Reuters के सर्वे से साफ संकेत मिल रहा है कि फिलहाल RBI ब्याज दर में बदलाव करने के बजाय इंतजार करना चाहता है. हालांकि, अगर आने वाले समय में महंगाई तेजी से बढ़ती है या रुपये और कच्चे तेल को लेकर स्थिति बिगड़ती है तो RBI अपना फैसला बदल सकता है.
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